दीवाली से पहले गन्ना पेराई को लेकर बढ़ी चिंता! मिलों का काम ठप, हर एकड़ ₹20000 के नुकसान का दावा क्यों कर रहे किसान?
महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसान समय से पहले पेराई का विरोध कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रति एकड़ ₹20,000 तक का नुकसान होने की आशंका है।
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गन्ना मिलों में पेराई का काम ठप!
HighLights
किसान समय से पहले गन्ना पेराई का विरोध कर रहे हैं।
महाराष्ट्र, कर्नाटक में चीनी मिलों का काम प्रभावित हुआ।
सरकार ने किसानों की चिंताओं पर समिति बनाई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| चीनी की बढ़ी कीमतें और सप्लाई की उपलब्धता की चिंताओं के बीच सरकार ने समय से पहले मिलों में गन्ने की क्रशिंग के निर्देश दिए थे। इस साल समय से पहले गन्ने की पेराई की तैयारियां पूरी हैं लेकिन गन्ना किसानों ने इसका विरोध किया है। गन्ना किसानों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से सिर्फ 15 में ही 2026-27 के पेराई सत्र में काम शुरू हुआ है, जबकि कर्नाटक में अबतक पेराई शुरू नहीं हुई है। मीडिया सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए सरकार ने एक समिति गठित की है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों में क्रशिंग मुश्किल
महाराष्ट्र में 40 मिलों ने अक्टूबर में शुरू होने वाले पेराई सत्र से पहले की परंपरागत पूजा कर ली है, लेकिन किसानों के आंदोलन के कारण वहां पूरी तरह से कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। सूत्रों की मानें तो राज्य में 8 अक्टूबर से 15 मिलों ने पेराई शुरू की है। इसके उलट कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन के कारण फिलहाल किसी भी शुगर मिल में गन्ने की क्रशिंग शुरू नहीं हो रही है। हालांकि, राज्य की 28 मिलों में से 8 स्पेशल सीजन में उगाए गए गन्ने की पेराई कर रही हैं।
क्या है किसानों की नाराजगी?
महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं। दोनों राज्यों के किसान गन्ने के लिए अधिक समर्थन मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाकर करीब ₹60 प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं साथ ही एथेनॉल के दाम बढ़ाने की मांग की है। इसके अलावा कई चीनी मिलों ने समय से पहले (अक्टूबर की शुरुआत में) पेराई सीजन शुरू करने से नाराजगी है। किसानों का तर्क है कि जल्दी पेराई करने से गन्ने में चीनी की रिकवरी कम आती है, जिससे उनका सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
किसानों द्वारा नेशनल हाइवे को रोकने की चेतावनी दिए जाने के बाद केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में किसान संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
किसानों को क्या नुकसान होगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक किसान नेता ने कहा कि सिर्फ त्योहारों के मौसम में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किसानों और चीनी मिलों को नुकसान क्यों उठाना चाहिए? किसान नेताओं के मुताबिक, समय से पहले अपरिपक्व गन्ने की पेराई से प्रति एकड़ करीब छह टन तक उत्पादन कम हो सकता है। इससे किसानों को लगभग 20 हजार रुपये प्रति एकड़ का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
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किसानों का कहना है कि, नवंबर के बाद गन्ने में सुक्रोज की मात्रा सामान्य तौर पर बढ़ती है, इसलिए समय से पहले पेराई करने पर चीनी की रिकवरी भी कम हो सकती है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि, इस सीजन में चीनी की रिकवरी कम रहने का असर अगले वर्ष किसानों को मिलने वाले गन्ने के भुगतान पर भी पड़ सकता है।
