नई दिल्ली (जेएनएन)। सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए सरकार के स्तर पर दिए जाने वाले प्रोत्साहन पैकेज के केंद्र में निर्यातक समुदाय और लघु व मझोली औद्योगिक इकाइयां होंगी। साथ ही सरकारी बैंकों को भी अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए सरकार दरियादिली दिखाएगी। वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के आला अधिकारियों के बीच इस प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप दिया जा रहा है जिसके बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को भी संकेत दिए हैं। वैसे यह तय है कि इस बार का पैकेज वर्ष 2008-09 के पैकेज से अलग होगा क्योंकि इसमें किसी खास उद्योग को शुल्क राहत नहीं दी जाएगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां एक समारोह में कहा कि यह एक सक्रियता से कदम उठाने वाली सरकार है। हम अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम आंकड़ों की समीक्षा कर रहे हैं और उचित समय पर उपयुक्त कदम उठाये जाएंगे। यह स्वीकार करते हुए कि देश में निजी निवेश नहीं बढ़ रहा है उन्होंने संकेत दिए कि सरकार इसे भी प्रोत्साहन देने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि सरकार यह चाहती है कि आर्थिक विकास दर में गिरावट को एक वर्ष के भीतर थामा जाए ताकि भाजपा अगले आम चुनाव में तेज विकास दर के साथ उतरे। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था की विकास दर 5.7 फीसद रही है। यह पिछले तीन वित्त वर्षो की अर्थव्यवस्था की सबसे सुस्त दर है।

सरकार के लिए राजस्व संग्रह की स्थिति भी बहुत संतोषजनक नहीं है। विनिवेश की धीमी रफ्तार है जबकि दूरसंचार कंपनियों की खराब हालत को देखते हुए स्पेक्ट्रम बिक्री से भी बहुत कमाई की उम्मीद नहीं है। विनिवेश से 72 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब इसके 40 हजार करोड़ रुपये से भी कम रहने की आशंका है। हो सकता है कि सरकार इस बार स्पेक्ट्रम की नीलामी भी नहीं करे। यही वजह है कि सरकार के स्तर पर पहली बार विकास दर को तेज करने के लिए अलग से उपाय करने पर विचार हो रहा है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अभी लघु व मझोले क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों और निर्यात क्षेत्र को मदद की दरकार है। इसके साथ ही सड़क व रेलवे की बड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि स्टील, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट जैसे उद्योगों में मांग को बढ़ावा मिल सके।

इस क्रम में सरकारी बैंकों को अतिरिक्त वित्तीय मदद देने का भी एलान होगा। पहले इन बैंकों को चालू वित्त वर्ष के दौरान 15 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी लेकिन इन्हें दरकार इससे काफी ज्यादा राशि की है। उक्त राशि के अलावा 25 हजार करोड़ रुपये की रकम इन बैंकों को और दी जा सकती है। राजग सरकार चार वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों को इंद्रधनुष योजना के तहत 75 हजार करोड़ रुपये दे चुकी है। वैसे रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि भारतीय बैंकों को 4,25,000 करोड़ रुपये की दरकार है।

जानकारों की मानें तो प्रोत्साहन पैकेज देने का मतलब ही है कि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में भी संशोधन को तैयार है। चालू वित्त वर्ष के लिए इसका लक्ष्य 3.2 फीसद रखा गया है। अब देखना होगा कि प्रोत्साहन पैकेज और राजस्व में कमी के बाद इसका नया स्तर क्या होता है।

Posted By: Surbhi Jain

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