नई दिल्ली, राजीव कुमार। कोरोना से पस्त इकोनॉमी में रिकवरी दर को लेकर अलग-अलग अटकलों के बीच अब बड़ी राहत के संकेत मिलने लगे हैं। जून माह के जीएसटी कलेक्शन से लेकर ऑटो बिक्री तक के आंकड़े रिकवरी के साफ संकेत दे रहे हैं। एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री भी बढ़ोतरी के साथ पूर्व कोरोना काल के स्तर पर पहुंचने की ओर है। सरकार की तरफ से ग्रामीण भारत के लिए दिए गए राहत पैकेज, रबी की बंपर खरीदारी एवं मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद से आगे भी ग्रामीण भारत की खपत में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।

जीएसटी कलेक्शन

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून महीने का जीएसटी कलेक्शन 90,917 करोड़ रुपए रहा। जाहिर तौर पर इसमें फरवरी, मार्च और अप्रैल का बकाया भी शामिल है लेकिन इसके बावजूद जो उछाल है उसे सकारात्मक माना जा रहा है। इस साल अप्रैल व मई में जीएसटी कलेक्शन क्रमश: 32,294 करोड़ व 62,009 करोड़ रुपए बताए गए। हालांकि पिछले साल जून के मुकाबले इस साल जून का जीएसटी कलेक्शन लगभग 9000 करोड़ कम रहा। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगले तीन महीने तक जीएसटी कलेक्शन जून के स्तर के आस-पास रहता है तब रिकवरी को लेकर पूर्ण आश्वस्त हुआ जा सकता है।

ऑटो बिक्री

ऑटो क्षेत्र की बिक्री भी आर्थिक मोर्चे पर मई के मुकाबले सुकून की तस्वीर पेश कर रही है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने इस साल जून में 57,428 वाहनों की बिक्री की जबकि इस साल मई में मारुति ने सिर्फ 13,702 वाहनों की बिक्री की थी। हालांकि पिछले साल जून में मारुति ने 1.24 लाख वाहनों की बिक्री की थी। हीरो मोटो कॉर्प ने इस साल जून में 4.5 लाख दोपहिया वाहनों की बिक्री की जो इस साल मई की बिक्री के मुकाबले 300 फीसद अधिक है। हालांकि इस साल हीरो मोटो की जून की बिक्री पिछले साल जून के मुकाबले 26.86 फीसद कम है।

रिकवरी में ग्रामीण भारत का हाथ

इकोनॉमी की रिकवरी में ग्रामीण भारत का हाथ अधिक दिख रहा है। कार और दोपहिया वाहनों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले गिरावट जारी है, लेकिन खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले तेजी दर्ज की गई। इस साल जून में एस्का‌र्ट्स ने 10,851 ट्रैक्टर की बिक्री की जबकि पिछले साल जून में कंपनी ने 8,960 ट्रैक्टर की बिक्री की थी जो पिछले साल के मुकाबले 21 फीसद अधिक है। महिंद्रा ट्रैक्टर की बिक्री में पिछले साल जून के मुकाबले 10 फीसद का इजाफा रहा।

निल्सन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में एफएमसीजी की बिक्री कोविड पूर्व के 85 फीसद के पास पहुंच गई जबकि शहरी क्षेत्र में यह बिक्री कोविड पूर्व के 70 फीसद के पास देखा गया। पारले जैसी कंपनी को ग्रामीण भारत से शहरी भारत के मुकाबले मांग में दोगुनी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

इसकी वजह है कि ग्रामीण भारत में कोविड का प्रभाव शहर के मुकाबले काफी कम है। रबी की बंपर फसल हुई जिसकी सरकारी खरीद से किसानों को 80,000 करोड़ रुपए मिले। इस साल मॉनसून के सामान्य रहने से पिछले साल के मुकाबले खरीफ की दोगुनी बुवाई हो चुकी है। सरकार के राहत पैकेज के तहत मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया। हाल ही में ग्रामीण भारत में 25 क्षेत्रों में रोजगार देने के लिए सरकार ने 50,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है। इसके अलावा मुफ्त राशन एवं जनधन महिला खाते में 500-500 रुपए की मदद भी ग्रामीण भारत में जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक इन तमाम पैकेज को देखते हुए इकोनॉमी को उबारने में असली मददगार ग्रामीण भारत होगा।

Posted By: Ankit Kumar

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