नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। केंद्र सरकार की उड़ान स्कीम में बड़ा संकट छोटे विमानों और पायलटों की उपलब्धता का है। देश में जितने नए पायलट हर वर्ष तैयार होते हैं, उन्हें बड़ी एयरलाइनें घरेलू उड़ानों के लिए भर्ती कर लेती हैं क्योंकि उनके प्रशिक्षित पायलट इंटरनेशनल उड़ानों में चले जाते हैं। ऐसे में छोटी एयरलाइनों को पायलट मिलना मुश्किल हो गया है। कम सीटों वाले छोटे विमान हासिल करना भी आसान नहीं है। डीजीसीए के कड़े नियम भी परेशान कर रहे हैं। जब तक इन मोर्चो पर ध्यान नहीं दिया जाता, उड़ान को पंख लगना मुश्किल है। ‘उड़ान’ की उड़ानें तभी कामयाब होंगी जब पहले सामान्य उड़ानों के अवरोध दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा।

छोटे हवाई अड्डों पर जरूरी सुविधाओं की कमी भी अवरोधक

छोटे विमानों और उनके पायलटों की कमी उड़ान स्कीम की फ्लाइटों में बाधक बन गई है। इसके अलावा छोटे शहरों में एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर की नाजुक हालत और पूरक उड़ानों का अभाव भी रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम को पंख पसारने से रोक रहा है। छोटे व मझोले शहरों को विमान सेवाओं से जोड़ने तथा क्षेत्रीय स्तर पर उड़ान सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने पिछले वर्ष ‘उड़े देश का आम नागरिक’ अर्थात ‘उड़ान’ नाम से रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम की शुरुआत की थी। इसके तहत लोगों को 2500 रुपये प्रति घंटे के किराये पर विमान या हेलीकाप्टर की यात्र करने का मौका उपलब्ध कराया गया है। लेकिन बुनियादी दिक्कतें स्कीम को आगे नहीं बढ़ने दे रही हैं।

सरकार ने पिछले वर्ष मार्च में पहले चरण के साथ उड़ान की औपचारिक शुरुआत की थी। इसके तहत पांच एयरलाइनों को 128 रूटों पर सस्ती विमान सेवाएं शुरू करने की इजाजत दी गई थी। लेकिन अभी तक केवल 27 रूटों के एग्रीमेंट हुए हैं। इनमें एयरलाइन अलाइड को आठ, स्पाइसजेट को छह, एयर ओडिशा को पांच तथा डेक्कन चार्टर्स और टबरे मेघा को चार-चार रूट दिए गए हैं। परंतु केवल एयरलाइन अलाइड, टबरे मेधा और स्पाइसजेट निर्धारित छह महीने के भीतर सेवाएं शुरू कर सकी हैं। जबकि डेक्कन चार्टर्स (एयर डेक्कन ब्रांड) की उड़ानें 23 दिसंबर 2017 को और एयर ओडिशा की 17 फरवरी 2018 को प्रारंभ हो सकीं।

जनवरी में घोषित दूसरे चरण में सरकार ने 15 एयरलाइनों को 325 और रूट आवंटित कर दिए हैं। मगर अब तक केवल 11 एयरलाइनों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ समझौते किए हैं। इनमें भी एयरलाइन अलाइड को छोड़कर किसी एयरलाइन की सेवा शुरू नहीं हुई है।

जल्दबाजी बनी मुसीबत: एयरलाइन उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक उड़ान स्कीम सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी स्कीम है। लेकिन इसे समुचित तैयारी के बगैर जल्दबाजी में शुरू किया गया है। यही वजह है कि केवल चुनिंदा एयरलाइनों को ही इसमें कुछ कामयाबी मिली है। जबकि ज्यादातर एयरलाइनों को दिक्कत आ रही है। सरकार के प्रोत्साहन और अग्रणी एयरलाइन बनने या बाजार कब्जाने की होड़ में कई नई एयरलाइनों ने स्कीम में प्रवेश तो कर लिया है मगर उन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।

सुविधाओं व यात्रियों का टोटा: जिन एयरलाइनों ने उड़ानें शुरू कर दी हैं, उन्हें भी बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि ज्यादातर छोटे शहरों के एयरपोर्ट अभी भी उड़ानों के लिए तैयार नहीं हैं। स्कीम के तहत एयरलाइनों को 50 फीसद सीटें सामान्य किराये पर भरने की छूट है। लेकिन ऐसे यात्रियों का टोटा है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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