पानी की बोतल पर सिर्फ ₹7 एक्स्ट्रा कमाने के चक्कर में दुकानदार पर ₹7 लाख का जुर्माना! शिकायतकर्ता को कितने मिलेंगे?
आंध्र प्रदेश के अन्नावरम मंदिर में एक दुकानदार को पानी की बोतल पर ₹7 अधिक वसूलना महंगा पड़ा। उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया।

MRP से अधिक पैसे वसूलने पर भारी जुर्माना
HighLights
दुकानदार ने पानी की बोतल पर ₹7 अधिक वसूले।
उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया।
शिकायतकर्ता को ₹15,007 का मुआवजा मिलेगा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बिजनेस में जरूरत से ज्यादा मुनाफा कमाना भी भारी पड़ सकता है। दरअसल आंध्र प्रदेश के अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर में एक श्रद्धालु को MRP से सिर्फ ₹7 महंगा पानी बेचना आफत की वजह बन गया। दुकानदार को ₹7 मुनाफे के बदले ₹7 लाख का दंड लगाया गया है। इसके अलावा 45 दिनों में पैसे न जमा करने पर भी सख्त रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला?
22 फरवरी 2026 को डी. वेंकटेश्वर राव नाम के एक श्रद्धालु श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर परिसर में लाइसेंसी की ओर से चलने वाली दुकान से 1 लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतल खरीदी। बोतल पर ₹18 MRP लिखा था, लेकिन दुकानदार ने उनसे UPI के जरिए ₹25 लिए, यानी उनसे बोतल में अंकित MRP से ₹7 ज्यादा वसूले गए।
राव ने जब एक्स्ट्रा पैसे लेने पर सवाल किया तो दुकानदार ने कथित तौर पर कहा कि उसे MRP से ज्यादा कीमत पर बोतल बेचने की अनुमति है। इसके बाद राव ने मंदिर प्रशासन को वॉट्सऐप के जरिए शिकायत की थी, लेकिन वहां किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
दुकानदार ने आरोप से किया इंकार
श्रद्धालु डी. वेंकटेश्वर राव ने ₹7 अधिक वसूलने का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जिसके बाद दुकानदार का भी पक्ष सुना गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुकानदार ने आरोप से इनकार करते हुए कहा कि ₹25 सिर्फ पानी की बोतल के लिए नहीं लिए गए थे। बल्कि श्रद्धालु ने ₹20 का एक कोल्ड ड्रिंक और ₹5 का बिस्किट भी खरीदा था और 25 रुपये का भुगतान इन सामानों के लिए किया था।
हालांकि,उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार की इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने UPI Paymet का रिकॉर्ड और पानी की बोतल की तस्वीर देखी, साथ ही फोटो खींचने के समय और भुगतान के समय को मैच किया। आयोग के मुताबिक ये सबूत शिकायतकर्ता के दावे का पक्ष मजबूत कर रहे थे। वहीं दुकानदार अपने दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
45 दिन में करना होगा आदेश का पालन
28 अगस्त 2026 को पारित आदेश के तहत लाइसेंसी को शिकायतकर्ता को ₹7 अतिरिक्त वसूले गए पैसे वापिस करने होंगे। इसके साथ ही ₹10,000 मुआवजा और ₹5000 मुकदमे और कोर्ट-कचेहरी के खर्च के रूप में देने होंगे। इसके अलावा ₹7 लाख कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने होंगे।
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उपभोक्ता आयोग ने सभी निर्देशों का पालन करने के लिए 45 दिन की समयसीमा दी है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर बकाया राशि पर डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान होने तक 9% सालाना ब्याज भी देना होगा।
