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एग्री सेक्टर की ग्रोथ के लिए शिवराज का मास्टर प्लान! कृषि मंत्रियों को दिए ₹1082 करोड़, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ेंगे किसान

Published: Tue, 29 Sep 2026 12:48 PM (IST)

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर ...और पढ़ें

शिवराज का मास्टर प्लान

शिवराज का मास्टर प्लान

HighLights

  1. राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, किसान आय पर जोर।

  2. 10 राज्यों को PM-RKVY के तहत ₹1082 करोड़ मिले।

  3. कृषि विकास, मिट्टी स्वास्थ्य, अंतर्राष्ट्रीय बाजार हेतु रोडमैप।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन- रबी अभियान-2026 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों शामिल हुए। इस दौरान शिवराज सिंह ने फूड सिक्योरिटी और किसानों की आय को बेहतर बनाने के मुद्दे पर खास जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश की खाद्य सुरक्षा बनाए रखने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर 'टीम एग्रीकल्चर' की भावना से काम करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकारें और पार्टियां आती-जाती रहती हैं, पार्टियां बनती और बिगड़ती हैं, लेकिन देश और किसान शाश्वत हैं।

कृषि मंत्रियों को दिए ₹1082 करोड़

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हर नीतिगत फैसले और अंतरराष्ट्रीय समझौतों में किसानों के हितों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को मंच पर ही ₹1082 करोड़ के वित्तीय स्वीकृति पत्र प्रदान किए।

सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट सहित केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न कृषि संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इन राज्यों के लिए शिवराज ने खोली तिजोरी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से ही PM-RKVY के अंतर्गत पश्चिम बंगाल को ₹290 करोड़, हरियाणा को ₹198 करोड़, छत्तीसगढ़ को ₹181 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को ₹154 करोड़, बिहार को ₹114 करोड़, कर्नाटक को ₹104 करोड़, मिजोरम को ₹75 करोड़, हिमाचल प्रदेश को ₹64 करोड़, झारखंड को ₹58 करोड़ और पंजाब को ₹43 करोड़ के स्वीकृति पत्र बांटे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन भी उपलब्ध करा रही है ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर तुरंत शुरू हो सके।

देश में तेजी से बढ़ रहा खाद्यान्न उत्पादन

देश की कृषि उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए शिवराज ने बताया कि साल 2015 के बाद देश की कृषि विकास दर 3 फीसदी से बढ़कर 4.5 फीसदी तक पहुंच गई है। सालाना खाद्यान्न उत्पादन में औसत बढ़ोतरी पहले के 40 लाख टन के मुकाबले अब दोगुनी से अधिक होकर 84 लाख टन हर वर्ष तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दो सालों में ही रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन का रिकॉर्ड इजाफा दर्ज किया गया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक ग्रोथ का श्रेय राज्यों के कृषि विभागों, वैज्ञानिकों और किसानों के साझा परिश्रम को दिया।

कृषि बैठकों के लिए वार्षिक कैलेंडर बना

एग्रीकल्चर ग्रोथ के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने खास रोड मैप भी बनाया है। कृषि अभियानों की पूर्व तैयारी के लिए इंटरफेस बैठकों का वार्षिक कैलेंडर तय करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि हर साल खरीफ के लिए 10 मई को जिला स्तरीय और 17 मई को राज्य स्तरीय बैठक होगी। इसी प्रकार रबी अभियान के लिए 10 सितंबर को जिला स्तरीय और 17 सितंबर को राज्य स्तरीय बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी।

इसके साथ ही, देश भर में एक ही दिन एकदिवसीय विशेष बैठक भी होगी, जिसमें पूरे देश में एक साथ कृषि मंत्री, अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक किसानों के हित में जुड़ेंगे।

मिट्टी की उर्वराशक्ति को लेकर खास प्लान

मिट्टी की हेल्थ और पर्यावरण संरक्षण को लेकर केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने इस साल 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में व्यापक 'खेत बचाओ अभियान' चलाने का आह्वान किया। इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों सहित सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। अभियान में सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया जाएगा ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति और मित्र कीट सुरक्षित रहें। साथ ही, पूर्वी भारत के राज्यों- झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में धान कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों (राइस फेलो) में दलहन की खेती को बड़े स्तर पर प्रमोट किया जाएगा।

इस साल की रबी तैयारियों के तहत उन्होंने मिट्टी में नमी और पानी की उपलब्धता के आधार पर ही फसलों और उन्नत बीजों की बुवाई की सलाह देने पर जोर दिया। उन्होंने फसलों को बीमारियों व कीटों से बचाने की पुख्ता व्यवस्था करने, सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के दायरे में लाने और फसल बीमा योजना के अंतर्गत पारदर्शी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) कराने के निर्देश दिए। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के मंत्री खुद सभी विभागीय योजनाओं के ऑपरेशन को मॉनिटर करें।

किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजर से जोड़ने की कोशिश

देश में बीज और उर्वरक की उपलब्धता को पर्याप्त बताते हुए शिवराज सिंह ने राज्यों को नकली खाद, नकली बीज और नॉन स्टैंडर्ड कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा जबरन टैगिंग को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को मिशन मोड में अपनाने का आह्वान किया।

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शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही और लाभकारी दाम दिलाने के लिए सरकार बहुत सी रणनीति पर काम कर रही है। इसमें पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, वेयरहाउसिंग और बिक्री की बेहतर व्यवस्था शामिल है। उन्होंने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर की MSP पर 100% सुनिश्चित सरकारी खरीद की जाएगी और 48 घंटे में भुगतान की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों की नई बाजार नीति का लाभ उठाकर भारतीय कृषि उत्पादों, फलों, सब्जियों और अनाज को वैश्विक निर्यात से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को उपज के बेहतरीन दाम मिल सकें और भारत दुनिया का प्रमुख 'फूड बास्केट' बन सके।