नई दिल्ली: केयर्न इंडिया के शेयरधारकों ने वेदांता लिमिटेड में मर्जर के लिए अनुमति दे दी है। इस मर्जर के पक्ष में 92.86 फीसदी वोट पड़े। जानकारी के मुताबिक इस साल के अंत तक इस मर्जर के पूरा हो जाने की उम्मीद है।

74.65 माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स ने मर्जर के पक्ष में वोट डाले

इससे पहले वेदांता रिसोर्सेज के शेयरधारकों ने भी मर्जर को अनुमति दे दी थी। वेदांता के छोटे शेयरधारकों का हिस्सा 29.7 फीसदी और केयर्न इंडिया के छोटे शेयर धारकों का हिस्सा 20.2 फीसदी होगा। 74.65 फीसदी छोटे शेयरधारकों का वोट मर्जर के पक्ष में पड़ा। एलआईसी के पास केयर्न इंडिया के 9.06 फीसदी शेयर हैं, जबकि केयर्न पीएलसी की कंपनी में 9.82 फीसदी हिस्सेदारी है।

क्या कहा अनिल अग्रवाल ने

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत को खनिज संपदा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ताकि इसके आयात में कमी हो सके। उन्होंने कहा कि अपने संसाधनों पर ध्यान देने से देश में रोजगार बढ़ेगा।
अग्रवाल ने कहा कि हमारे पास भरपूर संसाधन हैं और हमें उनके दोहन के बारे में सोचना चाहिए। मर्जर के बारे में बात करते हुए उन्होने कहा कि इससे एक ऐसी कंपनी बनेगी जो इस काम में मदद कर सकती है।

केर्यन-वेदांता मर्जर के लिए अग्रवाल ग्रुप ने जुलाई में किया था एडिशनल प्रेफरेंस शेयर देने का वादा

केयर्न इंडिया जहां एक ओर कैश रिच ऑयल कंपनी है वहीं वेदांता लिमिटेड फिलहाल कर्ज के दबाव में है। वेदांता पर 77,952 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन दोनों कंपनियों के मर्जर के लिए अनिल अग्रवाल ग्रुप ने इसी साल जुलाई में एडिशनल प्रेफरेंस शेयर देने का वादा किया था।

क्या हुई डील

रिवाइज्ड ऑफर के मुताबिक वेदांता केयर्न इंडिया के माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स (छोटे शेयरधारकों) को एक शेयर के बदले 10 रुपए की फेस वैल्यू वाले 4 रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर देगी। प्रेफरेंस शेयर पर अगले 18 महीनों के लिए 7.5 पर्सेंट का कूपन रेट होगा। ऐसा माना जा रहा है कि वेदांता केयर्न के पास पड़े 23,290 करोड़ रुपए के कैश का इस्तेमाल करना चाहती है।

Posted By: MMI Team

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