बंगाल से निकली भारत की पहली पेंट कंपनी, दो अंग्रेजों ने की थी शुरुआत; राष्ट्रपति भवन से हावड़ा ब्रिज तक इसी के रंग में रंगे
शालीमार पेंट्स, भारत की सबसे पुरानी पेंट कंपनी (India's oldest paint company) , की शुरुआत 1902 में हावड़ा में दो ...और पढ़ें

बंगाल से निकली भारत की पहली पेंट कंपनी
HighLights
शालीमार पेंट्स की स्थापना 1902 में हावड़ा में हुई।
राष्ट्रपति भवन, हावड़ा ब्रिज जैसी प्रतिष्ठित इमारतों को रंगा।
पूरे भारत में उत्पादन इकाइयां, मजबूत अनुसंधान एवं विकास।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: सिर्फ घरों की दीवारों को रंगने से लेकर देश की ऐतिहासिक इमारतों और औद्योगिक ढांचे तक, पेंट का कारोबार भारत में एक लंबा सफर तय कर चुका है। लेकिन इस बाजार की कहानी में एक ऐसा नाम भी है, (Oldest Paint Company in India) जिसकी शुरुआत आजादी से पहले, बंगाल में हुई थी। उस वक्त भारत पर अंग्रेजों का शासन था और देश में बड़े पैमाने पर पेंट बनाने का उद्योग आज की तरह विकसित नहीं हुआ था।
हम बात कर रहे हैं शालीमार पेंट्स (Shalimar paints) की, जिसकी शुरुआत 1902 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुई थी। कंपनी की स्थापना दो ब्रिटिश उद्यमियों ए.एन. टर्नर और ए.एन. राइट ने Shalimar Paint, Colour and Varnish Company के नाम से की थी। उसी साल यहां बड़े पैमाने पर पेंट बनाने का कारखाना लगाया गया, जिसे कंपनी दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी तरह का पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बताती है।
1928 में बदला कंपनी का नियंत्रण, 1963 में मिला नया नाम
शालीमार पेंट्स का सफर सिर्फ एक फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं रहा। साल 1928 में ब्रिटेन की पिंचिन जॉनसन एंड एसोसिएट्स ने कंपनी का नियंत्रण हासिल किया। इसके बाद 1963 में कंपनी का नाम बदलकर शालीमार पेंट्स लिमिटेड कर दिया गया। साल 1972 में यह सार्वजनिक कंपनी बनी और इसके शेयर बाजार में लिस्ट हुई। 1989 में कंपनी का अधिग्रहण मौजूदा प्रमोटर समूह ने किया।
राष्ट्रपति भवन से हावड़ा ब्रिज तक पहुंचा रंग
किसी पेंट कंपनी की पहचान सिर्फ उसके डिब्बों या रंगों से नहीं, बल्कि उन परियोजनाओं से भी बनती है, जिनमें उसके उत्पाद इस्तेमाल होते हैं। शालीमार पेंट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन, हावड़ा ब्रिज, विद्यासागर सेतु और सॉल्ट लेक स्टेडियम जैसी प्रतिष्ठित संरचनाओं पर उसके पेंट का इस्तेमाल हुआ है।
कंपनी ने घरों में इस्तेमाल होने वाले सजावटी पेंट के अलावा औद्योगिक कोटिंग्स के क्षेत्र में भी काम किया। विमान, जहाज और थर्मल पावर प्लांट जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष पेंट विकसित करना इसके औद्योगिक कारोबार का अहम हिस्सा रहा है।
हावड़ा से नासिक और सिकंदराबाद तक फैला कारोबार
शालीमार पेंट्स ने समय के साथ अपने उत्पादन का विस्तार किया। कंपनी ने 1992 में महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में दूसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की। इसके बाद 2002 में उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद में तीसरी उत्पादन इकाई स्थापित की गई। कंपनी ने दक्षिण भारत की मांग को पूरा करने के लिए तमिलनाडु में भी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा विकसित की।
कंपनी की विरासत में रिसर्च और डेवलपमेंट भी शामिल है। शालीमार ने 1902 में हावड़ा में अपना पहला R&D केंद्र स्थापित किया था। कंपनी के अनुसार, उसके इस केंद्र को 1979 में विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) से मान्यता मिली थी।
आज किसके हाथों में है कमान?
शालीमार पेंट्स की कमान कुलदीप रैना के हाथ में है। बता दें कि कुलदीप मई 2022 में शालीमार पेंट्स लिमिटेड में शामिल हुए। वही शालीमार में MD और CEO हैं।
