रॉयटर, बेंगलुरू। नवंबर में भारत के सर्विसेज सेक्‍टर में जबरदस्‍त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आईएचएस मार्किट के सर्विसेज परचेंजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (Services PMI Index) के अनुसार, सेवा संबंधी गतिविधियों में आई तेजी की एक बड़ी वजह घरेलू मांगों में मजबूत रिकवरी है, हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी चिंता की वजह बना हुआ है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था भारत की पिछली तिमाही में ग्रोथ, अन्‍य प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍थाओं की तुलना में काफी तेज रफ्तार से हुई है। इसकी बड़ी वजह कोरोना वायरस के टीकाकरण की तेज गति और सरकार के खर्च में बढ़ोतरी रही है। जुलाई-सितंबर की तिमाही में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था सालाना आधार पर शानदार 8.4 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ी।

आईएचएस मार्किट का सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स नवंबर में 58.1 के स्‍तर पर रहा जो अक्‍टूबर के 58.4 की तुलना में मामूली रूप से कम रहा। हालांकि, सेवा गतिविधियों की पिछले महीने की वृद्धि दर पिछले दशक में दूसरी बार सबसे बेहतर रही है। लगातार चौथे महीने भी सर्विसेज पीएमआई 50 के स्‍तर से ऊपर है, जो इसमें तेजी को ही प्रदर्शित करता है।

अक्‍टूबर को छोड़ दें तो नवंबर में नए व्‍यवसायों ने काफी तेजी से अपना विस्‍तार किया है जिसकी रफ्तार नौ साल में सबसे अधिक रही है। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू मांगों में तेजी हो रही रिकवरी रही है।

आईएचएस मार्किट की इकॉनोमिक्‍स एसोसिएट डायरेक्‍टर पॉलियामा डी लीमा ने कहा, 'भारतीय सेवा क्षेत्र में नवंबर के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसमें लगातार रिकवरी जारी है। कंपनियों को इस बात का भरोसा है कि आने वाले साल में आउटपुट का स्‍तर बढ़ेगा ही। हालांकि, इस भरोसे पर बढ़ती महंगाई का दवाब भी है।'

अप्रैल के बाद से इनपुट कॉस्‍ट में बड़े उछाल के बावजूद कंपनियों ने ग्राहकों पर ज्‍यादा बोझ नहीं डाला। इससे कंपनियों के मार्जिन पर दवाब बढ़ने का संकेत मिलता है।

Edited By: Manish Mishra