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कोरोना की दूसरी लहर से बैंकों में जमा बढ़ने के आसार, नए कर्ज में आएगी गिरावट: SBI

महाराष्ट्र दिल्ली मध्य प्रदेश राजस्थान जैसे राज्यों में कर्फ्यू या लाकडाउन है जिससे सेवा क्षेत्र पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। एसबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के कारण इस साल मार्च से बैंकों में राशि जमा होने की दर में काफी तेजी आई है।

By Pawan JayaswalEdited By: Published: Tue, 27 Apr 2021 08:20 AM (IST)Updated: Wed, 28 Apr 2021 06:58 AM (IST)
प्रतीकात्मक तस्वीर ( P C : Pixabay)

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। एसबीआइ ने कोरोना की दूसरी लहर की वजह से बैंकों में जमा बढ़ने का अनुमान लगाया है। पिछले साल भी कोरोना काल में बैंकों के कर्ज देने की दर कम हो गई थी, जबकि राशि जमा होने की दर बढ़ गई थी। एसबीआइ का अनुमान है कि कई राज्यों में लॉकडाउन जैसी स्थिति होने एवं पिछले साल के मुकाबले ज्यादा तेज संक्रमण के कारण बैंकों की जमा दर काफी अधिक रह सकती है।

महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में कर्फ्यू या लाकडाउन है, जिससे सेवा क्षेत्र पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। एसबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना की दूसरी लहर के कारण इस साल मार्च से बैंकों में राशि जमा होने की दर में काफी तेजी आई है।

मार्च में बैंकों में कुल 1796 अरब रुपये जमा किए गए, जबकि फरवरी में यह राशि 1358 अरब और जनवरी में मात्र 797 अरब थी। अप्रैल के तीन हफ्ते में 1743 अरब रुपये जमा हो चुके हैं। कोरोना के कारण वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में कर्ज की मांग काफी कम रही थी। बाद में हालात में सुधार से कर्ज की मांग धीरे-धीरे बढ़ी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21 में बैंकों से कर्ज लेने की दर में 5.6 फीसद की गिरावट रही, जबकि 2019-20 में बैंक से कर्ज लेने की दर में 6.1 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। बीते वित्त वर्ष में बैंकों में की गई जमा राशि में 11.4 फीसद की बढ़ोतरी रही, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में बैंकों में होने वाली जमा राशि में 7.9 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी।

पिछले साल अप्रैल-मई में देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से बैंकों में बड़ी रकम जमा हुई, क्योंकि खर्च करने का विकल्प नहीं था। इस बार भी अप्रैल से कमोबेश ऐसी स्थिति पैदा हो गई है और मई-जून तक इस प्रकार की स्थिति बनी रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों से कर्ज लेने की मांग काफी कम रह सकती है, क्योंकि सेवा क्षेत्र कोरोना की दूसरी लहर से काफी हद तक प्रभावित हो चुका है।


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