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'कागजी कंपनियों से शेयर बाजार को खतरा', कड़ी निगरानी की तैयारी; IPO में पैसा लगाने वाले सुनें SEBI चीफ ने क्या कहा?

Published: Thu, 29 Oct 2026 12:03 PM (IST)

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि बिना आर्थिक गतिविधि वाली सूचीबद्ध कंपनियां 'शेल कंपनियों' की तरह बाजार में ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शेल कंपनियां बाजार में जोखिम बढ़ाती हैं: सेबी चेयरमैन।

  2. सेबी आईपीओ फंड उपयोग निगरानी प्रणाली पर काम कर रहा।

  3. थर्ड-पार्टी एजेंसियां आईपीओ फंड के इस्तेमाल की जांच करेंगी।

नई दिल्ली। आपने शैल कंपनियों के बारे में काफी सुना होगा। शेल कंपनियों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और काले धन को सफेद करने के लिए होता है, और ऐसी कंपनियां शेयर बाजार के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। दरअसल, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में कहा कि बिना किसी आर्थिक गतिविधि वाली कुछ सूचीबद्ध कंपनियां 'शेल कंपनियों' की तरह काम करती हैं और बाजार में जोखिम बढ़ाती हैं।

तुहिन कांत पांडे ने यह भी बताया कि मार्केट रेगुलेटर एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रहा है, जिसके तहत "थर्ड-पार्टी निगरानी एजेंसियां" यह जांच करेंगी कि इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उसी काम के लिए किया जा रहा है या नहीं, जिसका जिक्र ऑफर डॉक्यूमेंट में किया गया था।

क्या होती हैं शैल कंपनीज?

शेल कंपनियां, ऐसी संस्थाएं होती हैं जिनका कोई सक्रिय व्यवसाय या संपत्ति नहीं होती है, और यह सिर्फ कागजों पर ही होती हैं। अक्सर इन कंपनियों का इस्तेमाल कालेधन को सफेद करने के लिए, फर्जी लेन-देन के लिए और टैक्स चोरी जैसे गलत कार्यों के लिए किया जाता है।

SEBI चीफ का बयान अहम क्यों? 

सेबी चीफ तुहिन कांत पांडे का ये बयान SEBI द्वारा इस महीने की शुरुआत में पेश किए गए प्रस्तावों के बाद आया है, जिसमें कंसल्टेशन पेपर में SEBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक वी. एस. सुंदरेशन के नेतृत्व वाले कार्य समूह ने प्रस्ताव दिया है कि 'ऑफर-फॉर-सेल' (बिक्री के लिए पेशकश) वाले हिस्से को छोड़कर, सभी प्रकार के इश्यू (जारी किए जाने वाले ऑफर) के लिए निगरानी एजेंसियों को अनिवार्य कर दिया जाए, चाहे उनका आकार कुछ भी हो।

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इन प्रस्तावों के तहत, स्टॉक एक्सचेंज किसी कंपनी पर अपनी निगरानी एजेंसी के साथ सहयोग न करने के हर मामले के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगा सकते हैं। अगर यह चूक जारी रहती है, तो एक्सचेंज डिपॉजिटरी को प्रमोटरों के डीमैट खाते फ्रीज करने का निर्देश देंगे। सहयोग न करने वाली कंपनियों को तब तक एजेंसी के साथ अपना करार खत्म करने या किसी दूसरी एजेंसी को नियुक्त करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि वे अपनी चूक को ठीक नहीं कर लेतीं। मौजूदा नियमों के तहत, अगर नया इश्यू 100 करोड़ रुपये से अधिक का है, तो IPO से प्राप्त राशि की निगरानी SEBI-पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।