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SEBI ने कृषि जिंस वायदा कारोबार में किया बदलाव, नियमों के उल्लंघन पर बना जुर्माने का नया फॉर्मूला

Published: Thu, 10 Sep 2026 12:05 PM (IST)Updated: Thu, 10 Sep 2026 12:08 PM (IST)

सेबी ने कृषि जिंस वायदा कारोबार में ग्राहकों के लिए सौदों की अधिकतम सीमा और उल्लंघन पर जुर्माने के नियमों ...और पढ़ें

कृषि जिंस वायदा कारोबार पर सेबी का नया सर्कुलर

कृषि जिंस वायदा कारोबार पर सेबी का नया सर्कुलर

HighLights

  1. सेबी ने कृषि जिंस वायदा कारोबार के नियमों में बदलाव किया।

  2. सौदों की अधिकतम सीमा उल्लंघन पर नया जुर्माना फॉर्मूला लागू।

  3. 'व्यापक जिंस' की परिभाषा में भी महत्वपूर्ण संशोधन किया गया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली|बाजार नियामक SEBI ने बीते बुधवार को कृषि जिंस वायदा कारोबार में ग्राहकों के लिए सौदों की अधिकतम सीमा में बड़ा बदलाव किया और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है। इसका उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक सर्कुलर में कहा कि नए नियमों के तहत ग्राहकों के स्तर पर निर्धारित सौदों की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करने पर जुर्माना अतिरिक्त सीमा और उल्लंघन जारी रहने के दिनों की संख्या के आधार पर तय किया जाएगा।

ऐसे तय होगी जुर्माने की राशि

सेबी को कृषि जिंस वायदा कारोबार में लागू सौदों की अधिकतम सीमा के नियमों का रिव्यू करने के लिए कई सुझाव मिले थे। सौदों को लेकर मौजूदा सीमाएं 2017 में उस समय की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई थीं। सर्कुलर के अनुसार, निर्धारित सीमा से दो प्रतिशत से अधिक के उल्लंघन पर जुर्माना सौदे की अतिरिक्त सीमा के बंद भाव, उल्लंघन के दिनों की संख्या और दो प्रतिशत से गुणा करके निकाली गई राशि या ₹2 लाख, जो भी कम हो, उसके बराबर होगा। वहीं, दो फीसदी तक के उल्लंघन पर इसी तरह जुर्माना निकाला जाएगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये होगी।

‘व्यापक जिंस’ की डेफिनेशन में भी बदलाव

SEBI ने जानकारी देते हुए कहा कि सदस्यों को अगले कारोबारी दिन तक सौदे की अतिरिक्त सीमा को निर्धारित सीमा के भीतर लाना होगा। यदि उल्लंघन जारी रहता है, तो शेयर बाजार बिना किसी अतिरिक्त सूचना के सौदे की अतिरिक्त सीमा को समाप्त कर सकता है। नियामक ने ‘व्यापक जिंस’ की परिभाषा में भी बदलाव किया है। अब किसी कृषि जिंस को ‘व्यापक जिंस’ तभी माना जाएगा, जब वह संवेदनशील जिंस की श्रेणी में न हो और पिछले पांच वर्षों में उसकी औसत डिलिवरी योग्य आपूर्ति मात्रा कम से कम 10 लाख टन या मूल्य के हिसाब से 5,000 करोड़ रुपये रही हो।

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बता दें कि इस संशोधित व्यवस्था के तहत ग्राहकों के स्तर पर सौदों की अधिकतम सीमा व्यापक जिंसों के लिए डिलिवरी योग्य आपूर्ति मात्रा का 3 प्रतिशत, सीमित जिंसों के लिए 1 प्रतिशत और संवेदनशील जिंसों के लिए 0.5 प्रतिशत होगी। सेबी ने कहा कि संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।