सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Sarojini Nagar Market में मिलते हैं मरे हुए लोगों के कपड़े? आखिर क्यों सस्ते में बिकते हैं इंटरनेशनल ब्रांड?

Published: Sat, 09 May 2026 11:14 AM (IST)

दिल्ली के सरोजिनी नगर मार्केट में सस्ते ब्रांडेड कपड़ों की उपलब्धता के पीछे के कारणों का खुलासा किया गया है। ...और पढ़ें

सरोजिनी नगर बाजार में क्या है सस्ते कपड़ों का राज? (सांकेतिक तस्वीर)

सरोजिनी नगर बाजार में क्या है सस्ते कपड़ों का राज? (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. सरोजिनी नगर में सस्ते कपड़ों की अफवाहों का खंडन।

  2. एक्सपोर्ट सरप्लस स्टॉक सस्ते कपड़ों का मुख्य कारण।

  3. मामूली खराबी वाले रिजेक्टेड कपड़े भी सस्ते में उपलब्ध।

नई दिल्ली| दिल्ली-मुंबई समेत देश के कई बाजारों में आपको सस्ती कीमतों में बड़े-बड़े ब्रांड के कपड़े मिल जाते हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है दिल्ली का सरोजिनी बाजार (Sarojini Nagar Market)। यहां आपको दुनियाभर के मशहूर ब्रांड के कपड़े बेहद सस्ते दामों में मिल जाएंगे। फैशनेबल टॉप से लेकर ब्रांडेड जैकेट और जींस पैंट यहां कई बार ₹50-100 में भी मिल सकते हैं।

सोरोजिनी नगर मार्केट को लेकर एक अफवाह ये भी है कि यहां मिलने वाले कपड़े अक्सर मरे हुए लोगों के होते हैं। कई बार ऐसा सुनने में आया है कि विदेशों में मरे हुए लोगों के कपड़े सस्ते दाम में यहां इंपोर्ट किए जाते हैं और उन्हीं कपड़ों को सस्ते दामों में दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में बेचा जाता है। हालांकि इस मामले पर कई मीडिया रिपोर्ट्स मौजूद हैं जिनमें बताया गया है कि आखिर ये कपड़े कहां से आते हैं और सस्ते दामों में क्यों बेचा जाता है, आइए जानते हैं।

क्यों सस्ते में मिलते हैं कपड़े?

महानगरों के स्थानीय बाजारों में कम कीमतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह एक्सपोर्ट सरप्लस स्टॉक है। इंटरनेशनल ब्रांड अक्सर जरूरत से ज्यादा कपड़े बनाते हैं, कई बार स्टॉक इतना ज्यादा हो जाता है कि उन कपड़ों को बर्बाद कर दिया जाता है, वहीं कंपनियां एक्स्ट्रा स्टॉक को बर्बाद करने के बजाय फैक्ट्रियां इस बचे हुए स्टॉक को थोक में रियायती कीमतों में बेच देती हैं। इन कपड़ों को खरीदने के बाद लोकल मार्केट में बेचा जाता है यही वजह है कि कई बार इंटरनेशनल ब्रांड के टैग वाले कपड़े सस्ते दामों में मिल जाते हैं।

स्टॉक में गड़बड़ी

महंगे और ब्रांडेड कंपनियां अपने कॉम्पटीशन को मजबूत रखने और लोगों तक विश्वास बनाए रखने के लिए फैक्ट्रियों में कपड़ा बनाते हुए छोटी-मोटी गलतियों जैसे- गलत सिलाई, धागा निकलना, हल्के-फुल्के डैमेज या रंगों के हेर-फेर में पूरे का पूरा बैच रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसके बाद व्यापारी रिजेक्टेड स्टॉक को सस्ते दामों में खरीद कर बेचते हैं। सरोजिनी जैसे बाजारों में अक्सर बड़े ब्रांड के रिजेक्टेड कपड़े मिल जाएंगे।

ये भी पढ़ें: 4.5 करोड़ रोजगार देने वाला सेक्टर घाटे में, सरकार के 2 मंत्रालयों के अलग-अलग मत; कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग तेज

पुराने कपड़ों का क्या चक्कर है?

सरोजिनी जैसे ही कुछ लोकल मार्केट हैं जहां कुछ दुकानों में पुराने या फिर इस्तेमाल किए हुए कपड़ों भी बिकते हैं। ये कपड़े अंतरराष्ट्रीय दान या फिर थोक रीसेल चैनल के जरिए आ सकते हैं। आपको बता दें कि ये कपड़े कई बार वजन के हिसाब से तौल कर बेचे जाते हैं, वहीं इनकी कीमत इतनी ज्यादा सस्ती होती है कि लोगों को शक होने लगता है।

सरोजिनी नगर मार्केट या इस तरह के अन्य लोकल बाजारों में मिलने वाले कपड़े मरे हुए लोगों के होते हैं इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिजेक्टेड स्टॉक और इंटरनेशनल दान ही सस्ती कीमतों की सबसे बड़ी वजह बताई जाती हैं।