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वेदांता को टक्कर देने वाले रुंगटा बंधु का फॉर्चून लिस्ट में आया पहली बार नाम, अनिल अग्रवाल के मुकाबले कितनी दौलत

Published: Sat, 12 Sep 2026 08:24 PM (IST)

रुंगटा माइन्स लिमिटेड के नंदलाल और मुकुंद रुंगटा पहली बार फॉर्च्यून इंडिया की टॉप 100 अरबपतियों की सूची में 61वें ...और पढ़ें

बाएं तरफ रुंगटा माइंस के दिवंगत फाउंडर एस.आर. रुंगटा और दाएं तरफ वेदांता के अनिल अग्रवाल।

बाएं तरफ रुंगटा माइंस के दिवंगत फाउंडर एस.आर. रुंगटा और दाएं तरफ वेदांता के अनिल अग्रवाल।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। रुंगटा माइन्स लिमिटेड (RML) को आगे बढ़ाने वाले नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा पहली बार फॉर्च्यून इंडिया की टॉप 100 अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हुए हैं। रुंगटा बंधु 61वें स्थान पर जगह बनाने में कामयाब रहे। रुंगटा भाइयों की कुल नेटवर्थ ₹40,000 करोड़ है।

इस लिस्ट में उनका नाम भारत के नेचुरल रिसोर्स सेक्टर में बनी भारी-भरकम दौलत को दिखाता है। उनका नाम आते ही इसी सेक्टर के बड़े दिग्गज और रुंगटा माइन्स के कंपटीटर से उनकी तुलना होने लगती है। फोर्ब्स के अनुसार, वेदांता के अनिल अग्रवाल की नेटवर्थ 59,244 करोड़ रुपये है। हालांकि अनिल अग्रवाल, रुंगटा भाइयों से लगभग 20,000 करोड़ रुपये आगे हैं।

कैसी है वेदांता और रुंगटा माइन्स की प्रतिद्वंदिता

यह फाइनेंशियल तुलना जमीनी स्तर पर चल रही कड़ी टक्कर को दिखाती है। रुंगटा माइन्स और वेदांता लिमिटेड भारत के नेचुरल रिसोर्स सेक्टर में, खासकर आयरन ओर, मिनरल की नीलामी के मामले में, एक-दूसरे के बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे मिनरल से भरपूर राज्यों में फायदेमंद मिनरल और माइनिंग लीज के लिए होने वाली बड़ी बोली की होड़ में ये दोनों कंपनियां अक्सर आमने-सामने होती हैं।

वेदांता की सेसा गोवा और RML, दोनों ही आयरन ओर के बड़े मर्चेंट और मर्चेंट-लिंक्ड प्रोड्यूसर के तौर पर काम करती हैं और वे लगातार मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती हैं और स्टील बनाने वाली बड़ी कंपनियों के साथ बातचीत करती हैं।

रुंगटा भाइयों का माइनिंग से स्टील की बड़ी कंपनी बनने तक का सफर

रुंगटा भाइयों की आर्थिक तरक्की दशकों से चली आ रही एक सोची-समझी रणनीति का नतीजा है। 1962 में स्वर्गीय एस.आर. रुंगटा ने इस सफर को शुरू था। तब 'एस.आर. रुंगटा ग्रुप' असल में सिर्फ माइनिंग का काम करता था, जिसमें आयरन ओर (लौह अयस्क) और मैंगनीज निकालना शामिल था।

पिता के निधन के बाद, नंदलाल और मुकुंद ने कंपनी की कमान संभाली। उनकी देखरेख में और बाद में नंदलाल के बेटे सिद्धार्थ रुंगटा (जो रुंगटा स्टील ब्रांड के चेयरमैन हैं) के शामिल होने से कंपनी में बड़ा बदलाव आया। 2000 के दशक में नियमों में हुए बदलावों का फायदा उठाते हुए, जिनकी वजह से चालू खदानों की संख्या कम हो गई थी, RML ने तेजी से फॉरवर्ड इंटीग्रेशन (उत्पादन के अगले चरणों में विस्तार) की रणनीति अपनाई।

आज, कंपनी झारखंड में चलियामा और ओडिशा में कमांडा जैसे कई आधुनिक प्लांट में पेलेट्स, स्पंज आयरन, बिलेट्स, TMT बार्स, वायर रॉड्स और डक्टाइल आयरन (DI) पाइप जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बनाती है।

रुंगटा माइन्स ने पूर्वी भारत में एक बड़ी पहचान बनाई

झारखंड के चाईबासा में हेडक्वार्टर और कोलकाता में रजिस्टर्ड ऑफिस वाली कंपनी, रुंगटा माइन्स ने जबरदस्त फाइनेंशियल ग्रोथ हासिल की है। कंपनी का रेवेन्यू, जो एक दशक पहले कुछ हजार करोड़ रुपये था, हाल के वर्षों में बढ़कर ₹13,500–15,000 करोड़ से ज्यादा के दायरे में पहुंच गया है। इस ग्रोथ को मजबूत क्रेडिट रेटिंग, कैप्टिव पावर जेनरेशन और सेक्टर में सबसे पहले किए गए डिजिटल बदलावों से बढ़ावा मिला है।

कमोडिटी साइकल को सफलतापूर्वक संभालने और अपने कैप्टिव रिसोर्स का विस्तार करके, नंदलाल और मुकुंद रुंगटा ने एक क्षेत्रीय माइनिंग ऑपरेशन को एक बड़ी इंटीग्रेटेड स्टील कंपनी में बदल दिया है।

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