नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। तेल और खाने-पीने के सामान की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से महंगाई तेज हुई है। सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 3.77 फीसद हो गया। अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 3.69 फीसद रही थी।

वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक उत्पादन के मामले में सुस्ती आई है। अगस्त महीने में आईआईपी घटकर 4.3 फीसद हो गया, जो पिछले तीन महीने का न्यूनतम स्तर है।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए सख्त मौद्रिक नीति की सलाह दी है। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी अनुमान को कम कर 7.3 फीसद कर दिया है।

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘महंगाई में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए मौद्रिक नीति को सख्त किए जाने की जरूरत है। रुपये में होने वाली गिरावट से इसके बढ़ने की आशंका है।’ गौरतलब है कि अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 4 सालों के अधिकतम स्तर पर जाने के बाद से रुपया लगातार टूट रहा है, जिसके बाद महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।

आरबीआई ने यथावत रखी दरें

इससे पहले बाजार के अनुमानों को धता बताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितता के माहौल को देखते हुए प्रमुख ब्याज दरों (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया था। 

हालांकि महंगाई की आशंका को देखते हुए आरबीआई से दरों में कटौती की उम्मीद थी। वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी मौद्रिक समीक्षा की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है।

Posted By: Nitesh