नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारतीय रिजर्व बैंक सामान्य बैंकिंग संस्थाओं की तरह को-ऑपरेटिव बैंकों के विनियमन का भी पूरा अधिकार चाहता है। पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक में भारी घोटाले की बात सामने आने के बाद को-ऑपरेटिव बैंकों पर नियंत्रण को लेकर आवाजें उठ रही हैं। इस सेक्टर पर लगाम कसने और बेहतर निगरानी के लिए उच्च स्तर पर विमर्श भी चल रहा है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए रिजर्व बैंक ने अब इस सेक्टर की लगाम अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव दिया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त मंत्रालय को इस संबंध में पत्र लिखकर सहकारी बैंकों का पूरा नियंत्रण देने को कहा है। 

वित्त मंत्रालय भी है पक्ष में

वित्त मंत्रालय के रुख से भी ऐसा लग रहा है कि वह आरबीआइ के इस प्रस्ताव के पक्ष में है। उम्मीद है कि संसद के आगामी बजट सत्र में मौजूदा बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में बड़े संशोधन कर शहरी सहकारी बैंकों के नियमन की पूरी जिम्मेदारी आरबीआइ को सौंप दी जाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते संसद को बताया था कि पीएमसी बैंक की घटना के बाद शहरी सरकारी बैंकों के निगरानी तंत्र में बदलाव करने के लिए आरबीआइ से बातचीत की जा रही है। अब यह सूचना आ रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि दोहरे रेगुलेशन की मौजूदा व्यवस्था के चलते शहरी सहकारी बैंकों की निगरानी में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। इन्हें दूर करने का एक ही तरीका है कि देश के दूसरे बैंकिंग सेक्टर की तरह ही इसकी बागडोर भी आरबीआइ को सौंप दी जाए। 

अभी आरबीआइ के साथ-साथ राज्यों का भी नियंत्रण

वर्तमान व्यवस्था में शहरी क्षेत्र के को-ऑपरेटिव बैंकों पर आरबीआइ के साथ-साथ राज्यों का भी नियंत्रण है। ऐसा होने से रिजर्व बैंक इनकी पूरी निगरानी करने में सक्षम नहीं हो पाता है। इस दोहरी व्यवस्था को सहकारी बैंकों में होने वाली गड़बड़ियों की एक बड़ी वजह माना जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से केंद्र सरकार को भेजे गए नोट में कहा गया है कि उसे शहरी सहकारी बैंकों के प्रबंधन की सारी गतिविधियों पर नजर रखने का अधिकार मिले। केंद्रीय बैंक ने जरूरत पड़ने पर प्रबंधन में बदलाव या प्रबंधन को निरस्त कर उसकी जगह अपने अधिकारियों को नियुक्त करने से लेकर इनकी अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों को भी अपने अधिकार में देने की बात कही है। अभी जब शहरी सहकारी बैंक पूरी तरह से विफल हो जाते हैं, तभी आरबीआइ उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करता है, जैसा पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक बैंक के मामले में हुआ है।

Posted By: Ankit Kumar

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