₹2248 करोड़ का महा-दान: आखिर नीता अंबानी के रिलायंस फाउंडेशन के पास कहां से आता है पैसा? 9.7 करोड़ लोगों की मदद का दावा
नीता अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस फाउंडेशन ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,248 करोड़ CSR खर्च किए और 9.7 करोड़ लोगों तक मदद पहुंचाई।

आखिर नीता अंबानी के रिलायंस फाउंडेशन के पास कहां से आता है पैसा?
HighLights
रिलायंस फाउंडेशन ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,248 करोड़ CSR खर्च किए।
नीता अंबानी के नेतृत्व में फाउंडेशन ने 9.7 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई।
जियो IPO के बाद रिलायंस समूह देश का सबसे मूल्यवान बना।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: आज यानी 28 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर की लिस्टिंग हुई है। शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio IPO) की धमाकेदार एंट्री ने देश के सबसे मूल्यवान कारोबारी समूहों की रैंकिंग बदल दी है। बुधवार को JIO का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट होते ही रिलायंस समूह ने टाटा समूह को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल कर लिया। इसके साथ ही अंबानी परिवार के सदस्य अलग-अलग बिजनेस की कमान संभालते हैं।
ऐसे ही एक नाम है रिलायंस फाउंडेशन, जिसकी कमान नीता अंबानी के हाथों में है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह परोपकारी संस्था शिक्षा(Philanthropic Educational Organization), स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और खेल से लेकर महिला सशक्तीकरण तक कई क्षेत्रों में काम करती है। लेकिन सवाल सिर्फ यह नहीं कि फाउंडेशन चलाता कौन है, बल्कि यह भी है कि इसके पास पैसा कहां से आता है, कितना खर्च होता है और अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी इसमें क्या भूमिका निभा रही है।
नीता अंबानी के साथ अगली पीढ़ी भी है जुड़ी
रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना साल 2010 में हुई थी। नीता अंबानी (Nita Ambani) इसकी संस्थापक और चेयरपर्सन हैं। इसके कामकाज में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, खेल, कला-संस्कृति और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी भी इससे जुड़ी है। ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी रिलायंस फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं। यानी परिवार की भागीदारी सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक पहलों में भी दिखाई देती है।
कहां जाता है पैसा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की FY2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत कुल ₹2,248 करोड़ खर्च किए। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में रिलायंस समूह का कुल CSR खर्च ₹2,156 करोड़ था। उस साल कंपनी ने ₹855 करोड़ रिलायंस फाउंडेशन को दिए थे। इसके अलावा अस्पताल ट्रस्ट, खेल, शिक्षा और अन्य सामाजिक संस्थाओं को भी रकम दी गई थी।
फाउंडेशन की कमाई कितनी है?
रिलायंस फाउंडेशन (Reliance foundation) का वित्त वर्ष 2024-25 का सालाना रेवेन्यू करीब ₹900.23 करोड़ था। फाउंडेशन को रिलायंस समूह से मिलने वाला सहयोग इसके वित्तपोषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
9.7 करोड़ लोगों तक पहुंचने का दावा
रिलायंस इंडस्ट्रीज की FY26 रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस फाउंडेशन की विभिन्न सामाजिक पहलों से अब तक देशभर में 9.7 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई गई है। इसके कार्यक्रमों में ग्रामीण समुदायों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं, खेल के अवसरों, पर्यावरण संरक्षण और आपदा के समय सहायता जैसे काम शामिल हैं।
Jio Platform की ताबड़तोड़ एंट्री
शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स की धमाकेदार एंट्री ने देश के सबसे मूल्यवान कारोबारी समूहों की रैंकिंग बदल दी है। बुधवार को जियो का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट होते ही रिलायंस समूह ने टाटा समूह को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल कर लिया। जियो की लिस्टिंग के बाद रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप ₹28.9 लाख करोड़ पहुंच गया। टाटा समूह ₹25.6 लाख करोड़ के साथ दूसरे और अदाणी समूह ₹16.6 लाख करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
जियो की इस एंट्री ने रिलायंस समूह की मार्केट वैल्यू में बड़ा इजाफा किया। ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले जियो का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट हुआ, यानी 21.4 फीसदी प्रीमियम पर। इस भाव पर जियो का मार्केट कैप ₹12.5 लाख करोड़ पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की संयुक्त मार्केट वैल्यू ही ₹28.7 लाख करोड़ हो गई। जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरहोल्डर्स की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। कंपनी के कुल 79.8 लाख शेयरहोल्डर्स हैं।
