सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

IDFC के बाद अब यस बैंक में पकड़ी गई गड़बड़ी, लाखों ग्राहकों का डेटा खतरे में; CVV तक हुए हैक

Published: Thu, 26 Feb 2026 08:24 AM (IST)

यस बैंक-बुकमायफॉरेक्स मल्टी-करेंसी फॉरेक्स कार्ड से जुड़े डेटा ब्रीच के बाद आरबीआई ने यस बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब ...और पढ़ें

यस बैंक के ग्राहकों का हुआ डेटा लीक

यस बैंक के ग्राहकों का हुआ डेटा लीक

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के बाद यस बैंक में कुछ गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। यस बैंक-बुकमायफॉरेक्स मल्टी-करेंसी फॉरेक्स कार्ड (Yes Bank-BookMyForex Multi-Currency Forex Card) से जुड़े एक बड़े डेटा ब्रीच के बाद, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यस बैंक के सीनियर अधिकारियों को तलब किया है। कई यूजर्स के कार्ड डिटेल्स और CVV नंबर हैक होने गए। आरबीआई ने इस बारे में डिटेल में जानकारी मांगी है कि यस बैंक के सिस्टम में कैसे सेंध लगी और किन घटनाओं की वजह से कस्टमर का सेंसिटिव डेटा लीक हुआ।

ये है डेटा लीक की डिटेल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरबीआई यह साफ करना चाहता है कि CVV नंबर समेत कितना सेंसिटिव कार्ड डेटा लीक हुआ होगा और इसे रोकने के लिए तुरंत क्या उपाय किए गए हैं। यस बैंक ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सवालों पर कोई जवाब नहीं दि, लेकिन कहा कि इंटरनल जांच में 24 फरवरी को एक लैटिन अमेरिकी देश में 15 मर्चेंट्स से जुड़े फ्रॉड ट्रांजैक्शन पाए गए।
5,000 कस्टमर्स के बीच लगभग 2.54 करोड़ के ट्रांजैक्शन को मंजूरी दी गई, जबकि लगभग 90 लाख के 688 अनऑथराइज्ड अटेम्प्ट्स को ब्लॉक किया गया।

यस बैंक ने उठाए ये कदम

अब यस बैंक कार्ड नेटवर्क के साथ मिलकर चार्जबैक शुरू करने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि प्रभावित कस्टमर्स को कोई फाइनेंशियल नुकसान न हो। इसके अलावा, BookMyForex ने कहा कि वह कस्टमर्स की सेंसिटिव कार्ड जानकारी स्टोर नहीं करता और उस समय के दौरान उसके सिस्टम में न तो कोई सेंध लगी और न ही कोई कॉम्प्रोमाइज हुआ।

RBI ने मांगी सारी जानकारी

इस बीच RBI ने यह भी डिटेल्स मांगी हैं कि सेंसिटिव कार्ड डेटा (खासकर CVV) को कैसे स्टोर और प्रोटेक्ट किया गया था, क्या एन्क्रिप्शन और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल फॉलो किए गए थे, और मौजूदा साइबर कंट्रोल्स एक्सपज़र को रोकने में फेल क्यों हुए?
इसके अलावा, रेगुलेटर डिटेक्शन और रिपोर्टिंग की टाइमलाइन, थर्ड-पार्टी रिस्क मैनेजमेंट और ओवरसाइट की मजबूती, प्रभावित कस्टमर्स की संख्या, और कार्ड्स को ब्लॉक करने, गलत इस्तेमाल को रोकने और संभावित नुकसान को कम करने के लिए उठाए गए कदमों की जांच कर रहा है।

ये भी पढ़ें - IDFC First Bank Share: ₹590 करोड़ के फ्रॉड ने हिला दिया मार्केट का भरोसा, 18% लुढ़का स्टॉक; अब क्या होगा?