RBI Repo Rate Hike: अक्टूबर में बढ़ेगी होम लोन की EMI? रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी की आशंका, 16 अर्थशास्त्रियों का अनुमान
RBI MPC Meeting: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जिसमें रेपो रेट ...और पढ़ें
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RBI Repo Rate Hike: अक्टूबर में बढ़ेगी होम लोन की EMI? रेपो रेट में 0.25% बढ़ोतरी की आशंका, 16 अर्थशास्त्रियों का अनुमान

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अगर आपने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, तो कल यानी 5 अक्टूबर से शुरू हो रही आरबीआई मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC Meeting) की बैठक आपके लिए अहम साबित हो सकती है। महंगाई का दबाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच अक्टूबर में रिजर्व बैंक रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ा सकता है। 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग विशेषज्ञों के सर्वे में ज्यादातर ने ब्याज दर बढ़ने की आशंका जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल इंतजार भी कर सकता है।
क्या बढ़ जाएगी लोन की EMI?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में रेपो रेट से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे कुछ कर्जदारों की EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है। हालांकि, इसका असर बैंक की नीतियों, लोन के प्रकार और रीसेट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल RBI का रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। अगर इसमें 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो यह बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगा। ऐसा हुआ तो 2025 में शुरू हुए ब्याज दरों में कटौती के दौर और उसके बाद लंबे समय तक दरें स्थिर रखने की नीति में बदलाव देखने को मिलेगा।
महंगाई बढ़ने से क्यों बढ़ी चिंता?
RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई पर काबू पाने की है। मिडिल ईस्ट में दोबारा बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से पेट्रोल-डीजल महंगे होने और दूसरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का जोखिम है।
अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो आठ महीने का उच्च स्तर है। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। महंगाई लगातार तीन महीनों से RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक,
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल से पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई का दबाव दूसरी वस्तुओं तक भी फैल सकता है और RBI को महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।"
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य आर्थिक सलाहकार कनिका पसरीचा का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों की दरों में बढ़ोतरी, महंगाई का जोखिम और आर्थिक विकास की मजबूत रफ्तार RBI को ब्याज दर बढ़ाने की गुंजाइश देते हैं।
- क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के मुताबिक, पिछली पॉलिसी के बाद पश्चिम एशिया के तनाव और ऊर्जा व कमोडिटी की कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो आगे भी दरें बढ़ सकती हैं।
- हालांकि, लार्सन एंड टुब्रो के ग्रुप चीफ इकोनॉमिस्ट सच्चिदानंद शुक्ला की राय अलग है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था में मांग के कारण महंगाई बढ़ने या जरूरत से ज्यादा तेजी के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला ले सकता है।
आगे कितनी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
सर्वे में कई विशेषज्ञों ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कम से कम दो बार ब्याज दर बढ़ने की आशंका जताई है। कुछ के मुताबिक, इस अवधि में दो से तीन बढ़ोतरी हो सकती हैं। हालांकि, यह विशेषज्ञों का अनुमान है, RBI का घोषित फैसला नहीं। IDFC फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक,
महंगाई बढ़ने के साथ मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे सामान्य करना जरूरी हो सकता है, ताकि आने वाली तिमाहियों में वास्तविक ब्याज दरें नकारात्मक न हों।"
दूसरी ओर, विशेषज्ञों को आर्थिक विकास दर के अनुमान में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। RBI ने अगस्त की पॉलिसी में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा था। DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव को इसमें मामूली बढ़ोतरी के साथ दर 7 प्रतिशत से ऊपर जाने की उम्मीद है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि RBI महंगाई को प्राथमिकता देकर ब्याज दर बढ़ाता है या अर्थव्यवस्था की रफ्तार को देखते हुए कुछ समय और इंतजार करता है। इसका जवाब अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में मिलेगा।
