RBI ने 13 एनबीएफसी के पंजीकरण रद्द किए, पश्चिम बंगाल की 11 कंपनियां शामिल
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए हैं, जिनमें से 11 पश्चिम बंगाल में स्थित हैं।
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13 एनबीएफसी के पंजीकरण रद्द
HighLights
आरबीआई ने 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए।
रद्द हुई कंपनियों में 11 पश्चिम बंगाल में पंजीकृत थीं।
अब ये कंपनियां नॉन-बैंकिंग वित्तीय कारोबार नहीं कर पाएंगी।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoRs) रद्द कर दिए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड 11 कंपनियां शामिल हैं। अब ये कंपनियाँ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कारोबार नहीं कर पाएंगी।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने "भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए" ये रजिस्ट्रेशन रद्द किए हैं।
इन 13 NBFCs में से 11 के रजिस्टर्ड ऑफिस पश्चिम बंगाल में हैं, जबकि बाकी दो तमिलनाडु में स्थित हैं। रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश सितंबर 2026 में अलग-अलग तारीखों पर जारी किए गए थे।
जिन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए, उनमें नकोदर फाइनेंस, अजीतनाथ स्टील्स, एस्ट्रोल डीलकॉम, भाग्यश्री ट्रेडिंग, बू फाइनेंस कंपनी और ब्राइटेक्स फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं।
RBI ने सजीली विनिमय, भूमिका फिस्कल सर्विसेज, ब्लू माउंट एक्सपोर्ट्स, डेल्टा कैपिटल मार्केट, राजेश फिस्कल सर्विसेज, सरला फाइनेंस और श्रेयांस व्यापार के रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिए।
इस कार्रवाई के असर के बारे में बताते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये कंपनियां "RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के क्लॉज़ (a) में बताई गई परिभाषा के अनुसार, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन का कारोबार नहीं करेंगी।"
शुक्रवार को जारी एक अलग प्रेस विज्ञप्ति में, RBI ने बताया कि 10 NBFCs ने अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिए हैं। इसके कारणों में कारोबार से बाहर निकलना, रेगुलेटरी क्लासिफिकेशन में बदलाव और कानूनी अस्तित्व का खत्म होना शामिल है। इनमें से छह कंपनियों ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के कारोबार से बाहर निकलने के कारण अपने सर्टिफिकेट सरेंडर किए।
इनमें प्रगति फिनकैप, राजलक्ष्मी वाणिज्य, विवृति कैपिटल, MSJ कोलोनाइजिंग एंड लीजिंग कंपनी, PKSL इन्वेस्टमेंट और HCL कॉर्पोरेशन शामिल हैं। RBI ने कहा कि उसने RBI एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत सरेंडर किए गए सर्टिफ़िकेट रद्द कर दिए हैं। एक और कंपनी, PCR इन्वेस्टमेंट्स ने अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाई होने के लिए जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर दिया; CIC के लिए RBI एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं होती है।
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इसी तरह, अपर्णा इन्वेस्टमेंट ने अनरजिस्टर्ड टाइप I NBFC के तौर पर क्लासिफ़ाई होने के लिए ज़रूरी शर्तें पूरी करने के बाद अपना सर्टिफ़िकेट सरेंडर कर दिया।
बाकी दो कंपनियों, वंदना गृह निर्माण और रामसिसारिया बिल्डर्स ने उन कंपनियों की कैटेगरी के तहत अपने सर्टिफ़िकेट सरेंडर किए जो विलय, मर्जर, भंग होने या स्वेच्छा से नाम हटाने के बाद कानूनी रूप से खत्म हो जाती हैं। RBI की दोनों घोषणाएं 9 अक्टूबर को जारी की गईं, जबकि रिलीज में बताई गई कैंसलेशन की तारीखें सितंबर 2026 की हैं।
