बनानी थी टेलीकॉम कंपनी, मजबूरी ने ऐसा पकड़ा कि बन गए हवाई कंपनी के मालिक; देखें राहुल भाटिया की पूरी कहानी
Success Story: इंडिगो के सह-संस्थापक राहुल भाटिया ने हाल ही में सीईओ का पद संभाला है। उनकी कहानी दिलचस्प है, ...और पढ़ें
-1773228877091_m.webp)
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) पिछले साल से ही संकट के चलते सुर्खियों में बनी हुई है। हाल फिलहाल (10 मार्च) में इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने व्यक्तिगत कारणों के चलते इस्तीफा दे दिया। इसके बाद फिर से इंडिगो सुर्खियों में आ गई।
अब सीईओ की जिम्मेदारी भी राहुल भाटिया ने संभाल ली है। इस एयरलाइन कंपनी की शुरुआत राहुल भाटिया और उनके दोस्त राकेश गंगवाल ने मिलकर की थी। आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने इंडिगो (Indigo Success Story) को भारत के एविएशन मार्केट में बड़ी कामयाबी दिलाई।
विरासत में मिला बिजनेस
राहुल भाटिया के पिता ने साल 1964 में नौ लोगों के साथ मिलकर ट्रैवल एयर एजेंसी की शुरुआत की। इसका नाम उन्होंने दिल्ली एक्सप्रेस रखा था। उन्हें पहले से ट्रैवल या एविएशन में नहीं जाना था। राहुल भाटिया ने अपनी पढ़ाई पर फोकस किया और आगे की स्टडी के लिए कनाडा चले गए। वहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।
साल 1980 में पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने IBM में दो साल तक काम किया। वे भारत लौटकर टेलीकॉम वेंचर शुरू करना चाहते हैं लेकिन मजबूरियां ऐसी आई कि उनका ये सपना कभी पूरा नहीं हो पाया। मजबूरी में सही राहुल भाटिया ने देश को एयरलाइन इंडस्ट्री की सबसे बड़ी कंपनी इंडिगो दी।
पिता की मौत ने किया मजबूर
पिता की मौत के चलते उन्हें फैमली बिजनेस ज्वाइन करना पड़ा। साल 1991 के अंत में उनके साथ बिजनेस कर रहे पार्टनर्स ने चुपके से सभी स्टेक्स अपने नाम कर लिए, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने फिर केवल 15 लाख रुपये से इंटरग्लोब कंपनी की शुरुआत की। ये कंपनी बीपीओ सर्विस, ट्रांसपोर्टेशन, हॉस्पिटैलिटी जैसी सर्विस देती थी। शुरुआत में कई दिक्कतों का सामना करने के बाद उन्हें सफलता मिलने लगी।
ऐसे हुई इंडिगो की शुरुआत
साल 2000 में उनकी मुलाकात राकेश गंगवाल से हुई। दोनों ने मिलकर साल 2006 में इंडिगो की शुरुआत की। इस कंपनी में राहुल के इंटरग्लोब कंपनी का 51.12 फीसदी हिस्सा और राकेश के सीलम का लगभग 48 फीसदी शामिल था।
