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Fuel Tax Cut: पेट्रोल-डीजल की कीमतें ना बढ़ेंगी ना घटेंगी, सरकार के इस फैसले से कम होगा तेल कंपनियों का घाटा

Published: Fri, 27 Mar 2026 11:04 AM (IST)Updated: Fri, 27 Mar 2026 11:22 AM (IST)

मोदी सरकार ने पश्चिम एशिया युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में ₹10 ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती।

  2. सरकारी तेल कंपनियों का भारी घाटा अब होगा कम।

  3. उपभोक्ताओं को महंगाई से मिलेगी सुरक्षा कवच।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में भारी कटौती की है। इस फैसले के बाद देश में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम स्थिर रहेंगे, लेकिन सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हो रहे भारी घाटे पर लगाम लगेगी।

एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती

वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।
पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये से घटाकर शून्य (0) कर दिया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

कच्चे तेल की कीमतों में 50% का भारी उछाल

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस वैश्विक संकट के कारण दुनिया भर में ईंधन महंगा हुआ है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और अफ्रीका में कीमतों में 30% से 50% की वृद्धि हुई है। उत्तरी अमेरिका में 30% और यूरोप में 20% का उछाल आया है। 

खत्म होगा तेल कंपनियों का भारी घाटा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल इतना महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। इसका सीधा खामियाजा हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) जैसी तेल कंपनियों को उठाना पड़ रहा था।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान हो रहा था। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी घटाने और खुद राजस्व का नुकसान सहने से अब इन कंपनियों का यह घाटा खत्म या काफी हद तक कम हो जाएगा।

आम जनता को महंगाई से 'सुरक्षा कवच'

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'X' पर लिखा कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा, "इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से सुरक्षा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और सप्लाई के उतार-चढ़ाव से बचाया जाए।" 

सरकार के पास दो ही विकल्प थे या तो अन्य देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए भी कीमतें भारी मात्रा में बढ़ा दी जाएं, या सरकार खुद अपने वित्त पर इसका बोझ उठाए। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय की तरह ही, सरकार ने एक बार फिर भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने के लिए अपने टैक्स रेवेन्यू (राजस्व) का नुकसान सहने का साहसिक फैसला किया है।

आपके शहर में कितनी है आज पेट्रोल की कीमत

Petrol Price Today City wise

आपके शहर में आज कितनी है डीजल की कीमत

Diesel Price Today City wise 

निर्यात पर लगाया गया भारी टैक्स

घरेलू खपत के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निर्यात पर भी सख्त कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छूती कीमतों का फायदा उठाने के लिए जो रिफाइनरियां विदेशों में तेल निर्यात कर रही हैं, उन्हें अब एक्सपोर्ट टैक्स चुकाना होगा। यह डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ (ATF - विमानन ईंधन) के निर्यात पर 29.5 रुपये प्रति लीटर होगा। इस संबंध में संसद को भी सूचित कर दिया गया है।