जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: भारत में तेजी से पैर पसार रहे ऑनलाइन गेमिंग से अब सरकार 28 फीसद का जीएसटी वसूल सकती है। अभी ऑनलाइन गेमिंग पर 18 फीसद का जीएसटी लगता है। ऑनलाइन गेमिंग के टैक्स दायरे की समीक्षा के लिए पिछले साल जीएसटी काउंसिल की तरफ से मंत्रियों के समूह (जीओएम) का गठन किया गया था। जीओएम ने अब ऑनलाइन गेमिंग के साथ कैसिनो व रेस कोर्स के कारोबार पर भी 28 फीसद जीएसटी लगाने का फैसला किया है। जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में जीओएम की रिपोर्ट रखी जाएगी। अमूमन जीओएम की सिफारिश मान ली जाती है।

रिसर्च एजेंसियों के मुताबिक भारत में ऑनलाइन गेमिंग का कारोबार 2.2 अरब डॉलर का है और इस कारोबार में वर्ष 2020 अगस्त से लेकर पिछले साल सितंबर तक 1.6 अरब डॉलर का विदेशी निवेश किया गया। फिलहाल ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां सकल गेमिंग राजस्व या फिर ऑनलाइन खिलाड़ि‍यों से गेमिंग प्लेटफार्म द्वारा ली जाने वाली कमीशन पर 18 फीसद जीएसटी देती है।

जीओएम के प्रस्ताव के मुताबिक अब इन कंपनियों को किसी खेल या प्रतियोगिता में प्राप्त हुए पूर्ण राजस्व पर जीएसटी देना होगा जो वर्तमान में इन कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले जीएसटी से छह गुना तक अधिक हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद इस मामले में पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। सूत्रों का कहना है कि 28 फीसद जीएसटी लगने पर ऑनलाइन गेमिंग की छोटी-छोटी देसी कंपनियां प्रभावित हो सकती है। ड्रीम 11, विंजो, एमपीएल, माइ11सर्किल, जैसे मनी गेमिंग ऑपरेटर्स क्रिकेट से जोड़कर ऑनलाइन गेमिंग का आयोजन करते हैं।

भारत में साल भर क्रिकेट का आयोजन होता है, इसलिए ये कंपनियां अपना प्रचार-प्रसार भी जबरदस्त तरीके से करती है। बड़े-बड़े क्रिकेट खिलाड़ी और फिल्मी सितारे ऑनलाइन गेमिंग का विज्ञापन करते हैं। वहीं कई विदेशी बेटिंग कंपनियां भी ऑनलाइन रूप से भारतीय लोगों को बाजी या दांव लगाने के लिए उकसाती है और ऐसे प्लेटफार्म भी भारतीय ऑनलाइन खिलाड़ि‍यों के बीच काफी सक्रिय हो गई है।

सरकार के लिए ऐसे ऑनलाइन प्लेटफार्म भी चिंता का विषय है क्योंकि इन सभी को रेगुलेट करने का अभी कोई नियम नहीं है। हालांकि ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने की मांग सरकार के स्तर पर कई बार उठी है और पिछले साल नीति आयोग ने ऑनलाइन गेम के बढ़ते कारोबार को देखते हुए इसे रेगुलेट करने की सिफारिश भी की थी। लेकिन कई स्टेकहोल्डर्स ने ऑनलाइन गेम पर रोक लगाने के पक्ष में अपनी राय दी है।

Edited By: Praveen Prasad Singh