ओडिशा तट पर मिला गैस का कुआं, गहरे पानी में 1.6 किलोमीटर नीचे; समुद्र मंथन स्कीम के तहत ONGC ने खोजा
ओएनजीसी ने ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में एक गहरे पानी वाले कुएं में गैस की खोज की है। यह खोज 'समुद्र मंथन' पहल के तहत हुई है।

ONGC ने 'समुद्र मंथन' पहल के तहत यह कुआं खोजा है।
HighLights
ओएनजीसी ने ओडिशा तट के पास गहरे पानी में गैस का कुआं खोजा।
यह खोज 'समुद्र मंथन' पहल के तहत की गई है।
इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और हाइड्रोकार्बन संसाधन बढ़ेंगे।
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी ऑयल एक्सप्लोरेशन और महारत्न कंपनी, ओएनजीसी (ONGC) ने ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में एक गहरे पानी वाले कुएं में गैस की खोज की है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने 'समुद्र मंथन' पहल के तहत यह कुआं खोजा है।
MN-DW18-1-H-D कुएं में 1,441–1,452 मीटर की गहराई पर गैस मिली है। इस कुएं को 1,623 मीटर की तय गहराई तक खोदा गया था।
कहां स्थित है यह कुआं?
कोणार्क से लगभग 43 किलोमीटर दूर स्थित यह कुआँ, इस अभियान के तहत ONGC द्वारा महानदी बेसिन में खोदा गया पहला कुआँ है। समुद्र तट के पास होने के कारण, आगे की जाँच और कमर्शियल मूल्यांकन के आधार पर, इससे जल्द ही कमाई शुरू होने की संभावना है।
25 जुलाई को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के आदेश पर इस कुएं की खुदाई शुरू की गई थी। 27 अगस्त को ONGC के चेयरमैन और CEO अरुण कुमार सिंह ने ड्रिलशिप 'प्लेटिनम एक्सप्लोरर' का दौरा किया और ड्रिलिंग अभियान में लगी टीम से बातचीत की। ONGC ने कहा कि पिछले तीन दिनों से इस कुएं से अच्छे फ्लो और रिज़र्वॉयर प्रेशर के साथ गैस निकल रही है।
क्या है समुद्र मंथन स्कीम?
हाल ही में केंद्र सरकार ने ‘समुद्र मंथन स्कीम’ को मंजूरी दी। इस योजना पर वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भारत सरकार का उद्देश्य क्रूड और गैस के आयात बिल को कम करना और विदेशी निर्भरता को घटाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने समुद्री तेल और गैस की खोज में तेजी दिखाई है। सरकार के मुताबिक, ‘समुद्र मंथन’ योजना से 60 करोड़ टन से ज्यादा तेल एवं गैस के नए भंडार मिलने की उम्मीद है।
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क्या फायदा होगा?
इस खोज से ONGC के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम और देश में ही हाइड्रोकार्बन रिसोर्स बेस को बढ़ाने की भारत की कोशिशों को मज़बूती मिलेगी। इस खोज और इलाके में हुई दूसरी खोजों को PNG नियम, 2025 के तहत मिली साझा सुविधाओं के ज़रिए विकसित किया जा सकता है, जिससे गहरे पानी (डीपवॉटर) वाले संसाधनों से उत्पादन शुरू हो सकेगा।
