भारत को मिली बड़ी कामयाबी! ऑयल इंडिया ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में खोजा प्राकृतिक गैस का भंडार
भारत की सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का बड़ा ...और पढ़ें

ऑयल इंडिया को कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस मिली।
HighLights
ऑयल इंडिया को कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस मिली।
परीक्षण में 2,00,000 एससीएमडी तक गैस प्रवाह दर्ज हुआ।
यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
एजेंसी, नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की मची किल्लत के बीच भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। भारत की सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले समुद्री क्षेत्र में एक ब्लॉक में प्राकृतिक गैस मिली है। कंपनी ने हाल में खोजे गए छोटे क्षेत्रों (डीएसएफ) की बोली प्रक्रिया के दौरान यह ब्लॉक हासिल किया था।
कंपनी ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह गैस भारत के पूर्वी तट के पास कृष्णा-गोदावरी बेसिन में मत्स्यपुरी ‘फॉर्मेशन’ में मिली, जिसका पहले कभी मूल्यांकन नहीं किया गया था। इस दौरान परीक्षण में अधिकतम 2,00,000 मानक घन मीटर प्रतिदिन (एससीएमडी) गैस प्रवाह दर्ज किया गया।
16 अक्टूबर को शुरू हुआ था परीक्षण
ओआईएल ने कहा कि यह खोज केजी-डीएसएफ/जीएसकेडब्ल्यू/2018 नाम के उथले समुद्री अपतटीय ब्लॉक में गोदावरी-1 आकलन कुएं में हुई। इसमें 16 अक्टूबर, 2026 को 2,024-2,027 मीटर की गहराई पर हाइड्रोकार्बन युक्त क्षेत्र का परीक्षण शुरू किया गया था।
कंपनी ने कहा कि इस कुएं से करीब 1,00,000 मानक घन मीटर प्रतिदिन की दर से गैस निकल रही है। निरंतर परीक्षण के दौरान अधिकतम 2,00,000 एससीएमडी की दर दर्ज की गई। कंपनी ने करीब 170 बैरल प्रतिदिन ‘कंडेनसेट’ उत्पादन की भी जानकारी दी।
‘कंडेनसेट’ किसी गैस या वाष्प के ठंडा होने या संघनन के बाद बनने वाला तरल पदार्थ है। ओआईएल ने कहा कि अधिक गहराई वाले क्षेत्र का परीक्षण करने की तैयारियां जारी हैं।
हालांकि, कंपनी ने इस खोज में मौजूद संभावित संसाधनों की मात्रा का कोई आकलन नहीं दिया। यह खोज ऐसे समय में घरेलू गैस का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकती है, जब भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों के एक बड़े हिस्से को पूरा करने के लिए अब भी आयात पर निर्भर है।
सरकार ने भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी मौजूदा करीब छह प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में घरेलू संसाधनों का विकास उसकी ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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