नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। देश के एक बड़े हिस्से में या तो बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं है या फिर बहुत कम उपलब्ध हैं, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में बैंकों की शाखाओं का काफी अभाव है। ऐसे में बैंकों का विलय करने से बैंक की शाखाओं की संख्या घटेगी और बड़े पैमाने पर फंसे कर्ज की वसूली पर से ध्यान भटकेगा। यह बात ऑल इंडिया बैंक एंम्प्लाईज एसोसिएशन (एआइबीईए) के एक शीर्ष अधिकारी ने कही।

एआइबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने एक बयान में कहा कि विलय के परिणामस्वरूप निश्चित रूप से बैंकों की शाखाएं बंद होंगी। जबकि बैंकिंग सुविधाएं सभी तक पहुंचाने के लिए हमें शाखाओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। विलय की सोच शाखाओं के विस्तार की सोच के बिल्कुल उलट है।

बैंकिंग सेक्टर में नौ यूनियन के प्रतिनिधि संगठन युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने 26 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल की अपील की है। यह हड़ताल बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के प्रस्तावित विलय के विरोध में की जा रही है। एआइबीईए यूएफबीयू की एक घटक है। हड़ताल से एक दिन पहले 25 दिसंबर को क्रिसमस है।

परिणामस्वरूप बैंक दो दिन बंद रहेंगे। वेंकटचलम ने कहा कि भारत में बैंकों का घनत्व कई देशों के मुकाबले कम है। इसलिए विलय की जगह बैंकिंग उद्योग के विस्तार की जरूरत है। अमेरिका मे 32.3 करोड़ की आबादी पर बैंकों की जितनी संख्या है, वह भारत में 1.35 अरब की आबादी पर बैंकों की मौजूद संख्या के मुकाबले अधिक है। इसलिए विलय की कोई जरूरत नहीं है। फंसे कर्ज की वसूली के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिएं, लेकिन बैंकों के विलय का सहारा लेकर सरकार मुद्दे से ध्यान भटका रही है।

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