नोएल टाटा ने TATA Sons की लिस्टिंग रोकने का निकाला तोड़, पेश किया 'टुकड़े' वाला आइडिया
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस को लिस्ट कराने के बजाय पुनर्गठन का सुझाव दिया है, ताकि ...और पढ़ें

टाटा संस पर बड़ी अपडेट
HighLights
नोएल टाटा ने टाटा संस के रिस्ट्रक्चरिंग का प्रस्ताव रखा
आरबीआई की जरूरतों के लिए लिस्टिंग के बजाय रिस्ट्रक्चरिंग का सुझाव
बोर्ड मीटिंग में लिस्टिंग और चेयरमैन की नियुक्ति पर गहरा मतभेद
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने सुझाव दिया है कि टाटा संस को अपनी होल्डिंग कंपनी को लिस्ट कराने के बजाय रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) के विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इसमें कंपनी को कई हिस्सों में बांटना भी शामिल हो सकता है, ताकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने यह प्रस्ताव 17 सितंबर को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में रखा, लेकिन यह साफ नहीं है कि बोर्ड इस पर विचार करेगा या नहीं।
नोएल टाटा का विरोध
टाटा संस में सबसे बड़ी हिस्सेदार, ट्रस्ट्स का मानना है कि होल्डिंग कंपनी को अनलिस्टेड ही रहना चाहिए और वे पब्लिक हुए बिना RBI की जरूरतों को पूरा करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में नोएल टाटा और टाटा संस के बाकी बोर्ड सदस्यों के बीच गहरा मतभेद सामने आया।
बाकी सदस्यों ने एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्त करने और लिस्टिंग की प्रोसेस शुरू करने के पक्ष में वोट दिया। नोएल टाटा ने इन दोनों ही कदमों का विरोध किया था।
वोटिंग नहीं हुई
रेगुलेटर ने टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी' (NBFC) के तौर पर क्लासिफाई किया है, जिससे उस पर सख्त रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा संस इस क्लासिफिकेशन के असर और अपने पास मौजूद विकल्पों पर विचार कर रही है।
रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि RBI के निर्देश से जुड़े प्रस्ताव पर कोई वोटिंग नहीं हुई, हालांकि इस मामले पर लंबी चर्चा हुई। टाटा ने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को इस मामले की विस्तार से जांच करने के लिए एक टीम बनानी चाहिए।
कैसे हो सकती है स्प्लिटिंग?
जानकारों का कहना है कि टाटा ग्रुप टाटा संस की रीस्ट्रक्चरिंग कई तरह से कर सकता है। इनमें डीमर्जर (अलग होना), एसेट्स को सब्सिडियरी में ट्रांसफर करना, मर्जर (विलय) या कोई व्यापक व्यवस्था योजना (scheme of arrangement) शामिल हैं।
टाटा संस के बड़े आकार को देखते हुए जानकार मान रहे हैं कि ऐसी किसी भी प्रक्रिया में रेगुलेटरी, कमर्शियल और टैक्स से जुड़ी बड़ी मुश्किलें आ सकती हैं।
टाटा संस, टाटा ग्रुप के कई तरह के बिजनेस की होल्डर है, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कैपिटल, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और अग्रटास जैसी कंपनियां शामिल हैं।
