'ये वोट गैरकानूनी', 4-1 से हुई हार पर भड़के नोएल टाटा; एन चंद्रा की पुनर्नियुक्ति को दी चुनौती
टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए चेयरमैन पद पर बनाए रखने को मंजूरी दे ...और पढ़ें

HighLights
एन चंद्रशेखरन के चेयरमैन पद पर पुनः नियुक्त के प्रस्ताव को मंजूरी।
बोर्ड ने पांच साल के कार्यकाल के लिए 4-1 से मतदान किया।
नोएल टाटा ने इस वोटिंग को 'गैर-कानूनी' करार दिया।
नई दिल्ली। टाटा समूह (Tata Group) में एन चंद्रशेखरन (N Chandra) के चेयरमैन पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। क्योंकि, टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाए रखने के लिए पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि बोर्ड की वोटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) को दूसरों से हार का सामना करना पड़ा। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के प्रमुख के तौर पर एन चंद्रशेखरन को बनाए रखने के पक्ष में 4-1 से वोट किया।
नोएल टाटा ने बताया कि वे इस वोट को "गैर-कानूनी" मानते हैं। उन्होंने उस फ़ैसले की वैधता को चुनौती दी है, जिसका भारत के सबसे बड़े बिज़नेस ग्रुप की लीडरशिप पर बड़ा असर पड़ सकता है।
वोटिंग से असहमत नोएल टाटा
नोएल टाटा ने कहा, “मैंने चेयरमैन के तौर पर चंद्रा की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था। एक कानूनी राय के आधार पर मेरे वीटो को गलत तरीके से दरकिनार कर दिया गया। यह फैसला गैर-कानूनी है। मैंने अपनी असहमति दर्ज कराई।”
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, नोएल की अगुवाई वाली टाटा ट्रस्ट्स सालाना आम बैठक (AGM) में चंद्रा को हटाने की कोशिश करेगी। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, "एक बार जब उन्हें डायरेक्टर के पद से हटा दिया जाएगा, तो वे चेयरमैन के तौर पर काम जारी नहीं रख पाएंगे।"
इस व्यक्ति ने कहा, "SRTT से जुड़ा मामला सुलझते ही AGM आयोजित की जाएगी।" इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "टाटा ट्रस्ट्स में से एक ने उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू करने और चंद्रा के तीसरे कार्यकाल के लिए आगे न बढ़ने के पहले के फैसले को स्वीकार करने के लिए पहले ही वोट कर दिया था।"
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टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन इस पर कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। हालांकि, होल्डिंग कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले कई टाटा ट्रस्ट, चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दे सकते हैं।
