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वित्त मंत्रालय ने UPI MDR पर अमेरिकी दबाव के आरोपों को नकारा... 'रुपे कार्ड को ही मिलेगी प्राथमिकता'

By Jagran BusinessEdited By: Kashid Hussain
Published: Thu, 17 Sep 2026 03:21 PM (IST)

वित्त मंत्रालय ने बड़े यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर लगाने के फैसले को अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों ...और पढ़ें

एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं

एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में नहीं

HighLights

  1. वित्त मंत्रालय ने यूपीआई एमडीआर पर अमेरिकी दबाव के आरोप खारिज किए

  2. एनपीसीआई दिशानिर्देश केवल रुपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई पर अनुमति देते हैं

  3. छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों को एमडीआर शुल्क से छूट मिलेगी

एजेंसी, नई दिल्ली। बड़ी कीमत के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किए जाने के आरोपों को वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के हाल में जारी दिशानिर्देशों में यूपीआई पर क्रेडिट कार्ड के जरिये लेनदेन के लिए केवल रुपे क्रेडिट कार्ड की अनुमति है और इससे विदेशी क्रेडिट कार्ड को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

जारी किया गया स्पष्टीकरण

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की 2026 की रिपोर्ट में भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली में अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सेवा प्रदाताओं को रुपे कार्ड के समान अवसर नहीं मिलने संबंधी टिप्पणियों के जवाब में यह स्पष्टीकरण दिया।
डीएफएस ने कहा, "एनपीसीआई के 15 सितंबर के परिपत्र में रुपे के अलावा किसी अन्य क्रेडिट कार्ड से यूपीआई पर क्रेडिट लेनदेन की अनुमति नहीं दी गई है। एमडीआर को किसी बाहरी प्रभाव के कारण लागू किए जाने का आरोप ‘गलत और भ्रामक’ है।"

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया

सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला अमेरिकी दबाव में किया है।
एनपीसीआई ने कहा है कि अधिक मूल्य के चुनिंदा लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का उद्देश्य यूपीआई परिवेश के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है। इसके साथ ही इससे छोटे तीसरे पक्ष के ऐप प्रदाताओं को बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं

एनपीसीआई ने नवंबर, 2020 में तीसरे पक्ष के ऐप प्रदाताओं के लिए 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी की सीमा तय की थी। हालांकि, उसका कहना है कि टिकाऊ राजस्व मॉडल के अभाव में बाजार की प्रमुख इकाइयों के अलावा अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं।
नए दिशानिर्देशों के तहत, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इसका भुगतान व्यापारी करेगा और 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा। वहीं, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

पांच रुपये का शुल्क

रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क होगा, जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा।
महीने में यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए एक लाख रुपये तक का संग्रह करने वाले छोटे व्यापारी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। गांवों और कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले यूपीआई क्यूआर भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।

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