नई दिल्ली। 8 नवंबर को सरकार की ओर से लिया गया नोटबंदी का फैसला बिना दिशा की एकतरफा तरीके से दागी गयी मिसाइल है। इसमें लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया है। ऐसा नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का कहना है।

सेन ने कहा, ‘समय-समय पर हम सरकार की ओर से एकतरफा ढंग से छोड़ी गयी मिसाइलों का सामना करते आ रहे हैं। नोटबंदी भी इसी तरह की एक मिसाइल है। लोगों को परेशानी दिक्कतों की रिपोर्ट्स सामने आ रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि यह मिसाइल कहां गिरी है।'

भारत रत्न से सम्मानित सेन ने सभी के लिए हेल्थकेयर विषय पर एक बोलते हुए कम्युनिस्ट चीन और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों में निर्णय करने की प्रक्रिया की तुलना करते हुए कही। उन्होंने यह भी कहा कि चीन में फैसले लोगों के एक छोटे समूह के दृष्टिकोण पर किये जाते हैं, जबकि हमारे देश में लोगों की मांग पर भी फैसले किये जाते हैं। अमर्त्य सेन ने कहा कि हमारे यहां राजनीतिक फैसले लोगों की राय के आधार पर होने चाहिए।'

सरकार के नोटबंदी के फैसले की पहले भी आलोचना कर चुके हैं सेन: अमर्त्य सेन पहले भी बीते 8 नवबंर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बैन करने के सरकार के फैसले का विरोध कर चुके है। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था में 80 फीसदी से ज्यादा की नकदी इन्हीं दो गुणांक के नोटों के रूप में देश की जनता के पास था।

Posted By: Praveen Dwivedi

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