यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जापान ने खोले ऊर्जा तकनीकी के द्वार
ग्लोबल पेट्रोलियम जगत में चीन के बढ़ते दबदबे से परेशान जापान ने भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में गहरे संबंध ...और पढ़ें

नई दिल्ली, [जागरण ब्यूरो]। ग्लोबल पेट्रोलियम जगत में चीन के बढ़ते दबदबे से परेशान जापान ने भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में गहरे संबंध स्थापित करने की नींव रख दी है। जापान न सिर्फ भारत को ताप बिजली घर स्थापित करने और कोयले की गुणवत्ता सुधारने के लिए अत्याधुनिक तकनीक देने को राजी है, बल्कि अन्य देशों में तेल व गैस ब्लॉक खरीदने में भी साथ मिलकर काम करेगा। कोयले की गुणवत्ता कोल वॉशरीज स्थापित कर सुधारी जाएगी। वैसे, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कुछ मुद्दों को लेकर अड़चन अभी बनी हुई है।
गुरुवार को यहां योजना आयोग और जापान के आर्थिक, व्यापार व उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों की बीच चली बैठक में भावी ऊर्जा सहयोग का खाका खींच दिया गया। संयुक्त बयान के मुताबिक पेट्रोलियम खोज व उत्पादन के लिए दोनों देश अन्य मुल्कों में भी संभावनाएं तलाशेंगे। इसी तरह से अन्य देशों में एलएनजी खरीदने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए भावी रणनीति बनाने की खातिर दोनों देशों के प्रतिनिधि दिसंबर, 2013 से बैठकों का सिलसिला शुरू करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी की कीमत को स्थिर रखने को लेकर भी दोनों देश साझा प्रयास करेंगे। पेट्रोलियम के अलावा बिजली और कोयले के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच गहरे तकनीकी संबंधों की नींव रख दी गई है। जापान न सिर्फ भारत की ताप बिजली घरों को आधुनिक बनाने में मदद करेगा, बल्कि इससे पर्यावरण को होने वाली हानि को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी भारत को मुहैया कराएगा।
भारत में आने वाले दिनों में सुपर क्रिटिकल और अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांटों को बेहतरीन तकनीकी भी जापान देने को तैयार हो गया है। इसी तरह से कोयला क्षेत्र में भी व्यापक संबंध स्थापित किए जाएंगे। भारतीय कोयले में राख की मात्रा को निकालने और उनकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए जापान मदद करेगा। दोनों देशों के बीच अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग स्थापित करने पर भी सहमति बनी है। एक अन्य मामले में जापान ने कहा है कि भारत से झींगा निर्यात में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए वह बात करेगा।
भारत को मिलेगी मदद-
1- दूसरे देशों में पेट्रोलियम ब्लॉक खरीदने में
2- ताप बिजली घरों को आधुनिक तकनीक में
3- कोयले की गुणवत्ता को सुधारने में
4- अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए वित्त जुटाने में
