नई दिल्ली, पीटीआइ। खाद्य तेलों के बढ़ते दामों से उपभोक्ता परेशान हैं, इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकार ने पाम तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में 112 डॉलर प्रति टन तक की कटौती की है। खाद्य तेल के आयात शुल्क मूल्य में यह कटौती बृहस्पतिवार (17 जून) से प्रभाव में आ जायेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें कम हो सकती हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना जारी कर कच्चे पाम तेल के आयात शुल्क मूल्य में 86 डॉलर प्रति टन और आरबीडी (रिफाइंड, ब्लीच्ड एंड डियोडराइज्ड) एवं कच्चे पामोलिन के आयात शुल्क मूल्य में 112 डॉलर प्रति टन की कटौती की है। बोर्ड ने कच्चे सोयाबीन तेल के आधार आयात मूल्य में भी 37 डॉलर प्रति टन कटौती की है।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क मूल्य में कटौती से घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें कम हो सकती हैं। देश में खाद्य तेलों की दो तिहाई मांग की पूर्ति आयात से होती है। पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दाम तेजी से बढ़े हैं। खाद्य तेलों के मामले में नवंबर से लेकर अक्टूबर तक का साल होता है।

सालवेंट एक्ट्रक्टर्स एसोसियेसन आफ इंडिया के अनुसार, (खाद्य और अखाद्य तेलों) सहित वनस्पति तेलों का कुल आयात नवंबर 2020 से लेकर मई 2021 के दौरान नौ प्रतिशत बढ़कर 76,77,998 टन तक पहुंच गया। जो कि इससे पिछले साल इसी अवधि में 70,61,749 टन रहा था।

एएमआरजी एण्ड एसोसियेट्स के वरिष्ठ पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि खाद्य तेल तिलहन की घरेलू खपत और मांग के बीच देश में बड़ा अंतर है जिसकी वजह से इनका बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है। पिछले कुछ माह के दौरान इनके खुदरा मूल्य में तेजी आई है।

उन्होंने कहा कि आधारभूत आयात मूल्य में होने वाले इस बदलाव का खुदरा दाम पर असर पड़ सकता है बशर्ते कि विनिर्माता, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं सहित पूरी आपूर्ति श्रृंखला से इस कटौती का लाभ उपभोक्ता तक पहुंचाया जाये।

Edited By: Nitesh