बुरी खबरों के बीच Yes बैंक के लिए गुड न्यूज, इंटरनेशनल एजेंसी Moodys ने दी रेटिंग; शेयरों में आएगी तेजी?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एटी-1 बॉन्ड राइट-डाउन रद्द करने के फैसले के बाद यस बैंक के शेयरों में गिरावट आई। हालांकि, ...और पढ़ें
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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने यस बैंक पर दी रिपोर्ट।
नई दिल्ली। पिछले एक सप्ताह में यस बैंक (Yes Bank) को काफी बुरी खबरों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते बैंक के शेयर 19 फीसदी तक टूट गए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एटी-1 बॉन्ड राइट-डाउन के फैसले को रद्द करने के बाद शेयरों में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद भी शेयरों में कमजोरी जारी रही। इस बीच अब ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने यस बैंक लिमिटेड की लॉन्ग-टर्म फॉरेन करेंसी और लोकल करेंसी बैंक डिपॉजिट रेटिंग को 'स्टेबल' आउटलुक के साथ 'Ba1' पर बरकरार रखा है।
रेटिंग एजेंसी ने बैंक के 'बेसलाइन क्रेडिट असेसमेंट' (BCA) और 'एडजस्टेड BCA' को भी 'ba2' पर बनाए रखा है, साथ ही इसके 'सीनियर अनसिक्योर्ड मीडियम-टर्म नोट प्रोग्राम' की रेटिंग को '(P)Ba1' पर बरकरार रखा है।
Yes Bank पर Moodys की रेटिंग्स
- लॉन्ग-टर्म फॉरेन करेंसी इश्यूअर रेटिंग: Ba1 पर बरकरार
- लॉन्ग-टर्म लोकल और फॉरेन करेंसी डिपॉजिट रेटिंग: Ba1 पर बरकरार
- बेसलाइन क्रेडिट असेसमेंट (BCA) और एडजस्टेड BCA: ba2 पर बरकरार
- सीनियर अनसिक्योर्ड फॉरेन करेंसी मीडियम-टर्म नोट प्रोग्राम: (P)Ba1 पर बरकरार
- शॉर्ट-टर्म फॉरेन और लोकल करेंसी डिपॉजिट रेटिंग: 'नॉट प्राइम' (NP) पर बरकरार
- रेटिंग आउटलुक: स्थिर (स्टेबल) बरकरार रखी
मूडीज़ ने यह भी कहा कि कम CET1 पूंजी के प्रभाव को ऑपरेशनल और फाइनेंशियल पैमानों को मजबूत करके कम किया जाता है।
एसेट क्वालिटी: 30 सितंबर 2026 तक, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग लोन (NPL) अनुपात में काफी सुधार हुआ और यह 1.2% हो गया।
प्रॉफिटेबिलिटी: 30 सितंबर 2026 को समाप्त छमाही में, टेंजिबल एसेट्स (ठोस परिसंपत्तियों) पर एनुअलाइज्ड नेट इनकम 0.8% रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 0.7% थी।
लिक्विडिटी: कोर बैंकिंग लिक्विडिटी स्थिर बनी हुई है। मार्च 2026 तक, हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स (HQLA) कुल टेंजिबल बैंकिंग एसेट्स का 17.9% थे। 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 131% दर्ज किया गया। इसमें RBI की FCNR(B) कंसेशनल स्वैप विंडो के तहत प्राप्त फंड का भी योगदान रहा।
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15 अक्टूबर को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यस बैंक की AT1 प्रतिभूतियों (securities) को 'राइट-डाउन' (मूल्य घटाने) के फैसले को रद्द करने वाले बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा। साथ ही, न्यायालय ने यस बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारत सरकार द्वारा दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया। न्यायालय ने AT1 प्रतिभूतियों को बहाल करने का आदेश दिया, क्योंकि इन्हें राइट-डाउन करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
