₹10 हजार किलो की चीज से बनेगा सोना! इस कंपनी ने किया दावा; क्या दुनिया में आएगी Gold की बाढ़?
सैन फ्रांसिस्को की कंपनी मैराथन फ्यूजन ने न्यूक्लियर फ्यूजन से पारे को सोने में बदलने का दावा किया है, जो CERN के रिकॉर्ड से 10 गुना अधिक है।

पारा बनेगा सोना! क्या अब सस्ता हो जाएगा गोल्ड?
HighLights
मैराथन फ्यूजन ने न्यूक्लियर फ्यूजन से पारे को सोने में बदला।
कंपनी का दावा CERN के रिकॉर्ड से 10 गुना बेहतर।
दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं, सोने के भविष्य पर असर अज्ञात।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में अगर पारे (Mercury) से सोना बनाने का तरीका कामयाब हो जाए तो क्या आने वाले समय में गोल्ड (gold) सस्ता हो सकता है? विज्ञान की दुनिया से एक ऐसा ही चौंकाने वाला दावा सामने आया है। सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी का कहना है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक की मदद से पारे को शुद्ध सोने में बदलने में सफलता हासिल की है। कंपनी के मुताबिक, सोना बनाने की उसकी दर 2025 में CERN के दर्ज किए गए रिकॉर्ड से 10 गुना ज्यादा है। हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
कैसे पारे से सोना बनाने का दावा किया गया?
कंपनी का नाम Marathon Fusion है। अमेरिका के इस स्टार्टअप ने एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि का दावा किया है। कंपनी का कहना है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक का इस्तेमाल करके पारे को स्थिर सोने में बदल दिया है यह एक ऐसा कारनामा है जिसे सदियों पुरानी 'कीमियागरी' (alchemy) की खोज से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि, कंपनी के इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सैन फ्रांसिस्को स्थित 'मैराथन फ्यूजन' ने घोषणा की कि उसने फ्यूजन से उत्पन्न न्यूट्रॉन का उपयोग करके पारे को सोने में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि उनका सोना बनाने का रेट, 2025 में CERN द्वारा बताए गए बेंचमार्क से 10 गुना अधिक है। आपको बता दें कि भारत में शुद्ध तरल पारा (Liquid Mercury) का सामान्य रेट ₹10,000 प्रति किलोग्राम है।
यह प्रक्रिया कैसे कार्य करती है?
मैराथन फ्यूजन के अनुसार, यह प्रक्रिया 'न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन' पर आधारित है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें परमाणु के केंद्रक (न्यूक्लियस) में बदलाव करके एक तत्व को दूसरे तत्व में बदल दिया जाता है। कंपनी ने बताया कि उन्होंने फ्यूजन प्रतिक्रियाओं के दौरान पैदा होने वाले उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन के संपर्क में मरकरी-198 को रखा। इससे मरकरी-197 बना, जो एक रेडियोधर्मी आइसोटोप है और अंततः विघटित होकर स्थिर गोल्ड-197 में बदल जाता है। लेकिन यहां कोई सामान्य रासायनिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए परमाणु के केंद्र यानी न्यूक्लियस में बदलाव किया जाता है। इस तकनीक को न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन कहते हैं।
कैसे की जा सकती है CERN के रिकॉर्ड तुलना?
2025 में, यूरोप की प्रमुख वैज्ञानिक संस्था CERN के शोधकर्ताओं ने बताया कि 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' में किए गए प्रयोगों के दौरान उन्होंने बहुत कम मात्रा में सोना तैयार किया। 2015 से 2018 के बीच किए गए इन प्रयोगों में लगभग 29 पिकोग्राम सोना बना, जो कि बहुत ही मामूली मात्रा है।
मैराथन फ्यूजन ने कहा कि उसके तरीके से सोने के उत्पादन की दर उस बेंचमार्क की तुलना में दस गुना अधिक रही। हालांकि, कंपनी ने उत्पादित सोने की मात्रा, उसकी शुद्धता, रिकवरी दक्षता या इस प्रक्रिया की लागत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, जिससे इसका स्वतंत्र मूल्यांकन करना मुश्किल हो गया है।
क्या अब बाजार में सस्ता हो जाएगा सोना?
यही वह सवाल है, जिस पर निवेशकों और सोना खरीदने वालों की नजर रहेगी। अगर भविष्य में प्रयोगशाला में सोना बनाना बड़े पैमाने पर संभव हुआ, तो इसकी सप्लाई पर असर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल सोने की कीमतों में गिरावट आने या ज्वेलरी सस्ती होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Last month, we demonstrated high-rate alchemy: turning mercury into real, stable gold, beating CERN’s record by a factor of 10. Last week, we enriched isotopes in the world’s most powerful plasma centrifuge, beating the Soviet record that stood for 40 years. Now, we’re building a fusion reactor in San Francisco to achieve record power density.
— Marathon Fusion (@MarathonFusion) October 21, 2026
कंपनी ने पहले अनुमान लगाया था कि भविष्य में एक फ्यूजन पावर प्लांट से सालाना करीब दो टन सोना बनाया जा सकता है। यह अभी एक सैद्धांतिक अनुमान है, न कि व्यावसायिक उत्पादन का प्रमाण। इसके लिए उन्नत तकनीक, भारी निवेश और व्यावसायिक स्तर पर सफल फ्यूजन रिएक्टरों की जरूरत होगी।
