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इलायची-काली मिर्च बेचने वाला कैसे बना 'डायमंड किंग'? 440 वर्ग फुट की दुकान से 14 देशों में फैला कारोबार; पढ़ें दिलचस्प कहानी

Published: Mon, 12 Oct 2026 01:00 PM (GMT+05:30)

र बड़ा कारोबारी किसी बड़े बिजनेस आइडिया के साथ ही शुरुआत करे, यह जरूरी नहीं है। कई बार छोटी-सी दुकान, ...और पढ़ें

इलायची-काली मिर्च बेचने वाला कैसे बना 'डायमंड किंग'?

इलायची-काली मिर्च बेचने वाला कैसे बना 'डायमंड किंग'? 

HighLights

  1. एमपी अहमद ने 20 साल की उम्र में व्यापार शुरू किया।

  2. मसालों से ज्वेलरी व्यवसाय में कदम रखा, ब्रांड बनाया।

  3. आज मालाबार गोल्ड का 27,000 करोड़ का साम्राज्य है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: हर बड़ा कारोबारी किसी बड़े बिजनेस आइडिया के साथ ही शुरुआत करे, यह जरूरी नहीं है। कई बार छोटी-सी दुकान, सीमित कमाई और कारोबार में मिली कोई ठोकर जिंदगी की दिशा बदल देती है। केरल के एक युवा कारोबारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कभी वह इलायची, काली मिर्च और नारियल बेचकर अपना कारोबार चलाते थे। लेकिन उन्हें जल्द ही एहसास हो गया कि सिर्फ सामान खरीदने और बेचने से बहुत बड़ा बिजनेस खड़ा करना मुश्किल है। फिर एक दिन मुंबई के एक कारोबारी से जुड़ा ऐसा वाकया हुआ, जिसने उन्हें बिजनेस का एक बड़ा सबक सिखाया। इसी सबक ने उन्हें मसालों के व्यापार से निकालकर सोने और हीरे की दुनिया का किंग बना दिया।

20 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार

यह शख्स कोई और नहीं मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स (Malabar Gold and diamonds) कंपनी के फाउंडर एमपी अहमद (MP Ahammed) हैं, जिन्होंने एक बिजनेस से ठोकर खाई लेकिन आज 27000 करोड़ का साम्राज्य बना लिया है। एमपी अहमद का जन्म व्यापारियों और जमीन-जायदाद से जुड़े परिवार में हुआ था। कारोबारी माहौल में पले-बढ़े अहमद ने साल 1979 में, महज 20 साल की उम्र में अपना व्यापार शुरू किया। वह केरल के कोझिकोड में खुदरा कारोबारियों को इलायची, काली मिर्च और नारियल की सप्लाई करते थे। शुरुआत में यह कारोबार ठीक चला, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास होने लगा कि सिर्फ मसालों की ट्रेडिंग के सहारे वह बहुत बड़ा बिजनेस खड़ा नहीं कर पाएंगे। उन्हें कुछ ऐसा करना था, जिसमें ब्रांड बनाया जा सके और कारोबार को बड़े स्तर तक पहुंचाया जा सके।

मिला जिंदगी बदलने वाला सबक

अहमद की जिंदगी में एक ऐसा वाकया आया, जिसने उन्हें ब्रांड की अहमियत समझा दी। शुरुआती कारोबारी दिनों में मुंबई के एक रिटेलर पर अहमद का काफी पैसा बकाया था। आर्थिक तंगी के कारण वह कारोबारी रकम नहीं चुका पा रहा था और अपना कारोबार बंद करने की नौबत आ गई थी। उस कारोबारी ने अहमद से कहा कि वह अपना ब्रांड बेचकर उनका बकाया चुका देगा। इस घटना ने अहमद को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें समझ आया कि एक मजबूत ब्रांड की अपनी अलग पहचान और कीमत होती है। सिर्फ सामान खरीदने-बेचने से आगे बढ़कर अपना ब्रांड बनाना भी बिजनेस की बड़ी ताकत है।

यहीं से अहमद की सोच में बदलाव आया। उन्होंने तय किया कि अब अपना ब्रांड बनाएंगे, लेकिन मसालों के कारोबार में नहीं। उन्होंने एक बिल्कुल नए क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। फिर मार्केट रिसर्च के बाद उन्हें यह समझ आया कि गोल्ड का व्यापार करना काफी लाभदायक हो सकता है।

कारोबार के लिए कैसे जुटाए पैसे?

एमपी अहमद (MP Ahammed success story) ज्वेलरी का बिजनेस करना चाहते थे। लेकिन इसके लिए उतनी पूंजी नहीं थी। इसके लिए उन्होंने प्रॉपर्टी बेचने का फैसला किया। किसी तरह उन्होंने 50 लाख रुपये जुटाए और कारोबार की शुरुआत कर दी।

1993 में ज्वेलरी कारोबार में रखा कदम

साल 1993 में अहमद ने ज्वेलरी कारोबार की ओर रुख किया। उन्होंने पुरानी ज्वेलरी के कारोबार से शुरुआत की और इसके बाद केरल के कोझिकोड (कालीकट) में 440 वर्ग फुट का अपना पहला रिटेल स्टोर खोला। इसी सफर से Malabar Gold & Diamonds की नींव पड़ी। एक नए क्षेत्र में उतरना आसान नहीं था, लेकिन अहमद का लक्ष्य सिर्फ दुकान चलाना नहीं, बल्कि एक ऐसा ब्रांड खड़ा करना था जिसकी पहचान दूर तक बने। धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार हुआ और ज्वेलरी की दुनिया में कंपनी की मौजूदगी बढ़ती चली गई।

खुद शुरू किया था ज्‍वैलरी बनाना

बता दें कि एमपी अहमद ने अपने कारीगरों के जरिए खुद ज्‍वैलरी बनाने का फैसला किया। वे गोल्‍ड बार खरीदते और खुद ज्‍वैलरी बनाकर बेचते। उनके डिजाइन और कलेक्‍शन ने ग्राहकों को लुभाया और स्‍टोर चल पड़ा। कारोबार ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी तो अहमद ने तिरूर और थेलिचेरी में दो और स्‍टोर खोल डाले। कोझिकोड में भी 400 वर्गफुट का पुराना स्‍टोर बंद करके साल 2015 में 4000 वर्गफुट में नया स्‍टोर खोला। क्‍वालिटी को बनाए रखने के लिए उन्‍होंने 1999 में BIS हॉलमार्क वाली ज्‍वैलरी बेचनी शुरू कर दिया। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनका बिजनेस में लगातार सफलता मिलती चली गई।

कैसे रखा विदेश में कदम?

भारत में बिजनेस सफल होने के बाद साल 2001 में कंपनी ने देश के बाहर कदम रखा और खाड़ी देश में अपना पहला स्‍टोर खोला। इसके बाद सफलता ने ऐसी रफ्तार पकड़ी जो कभी नहीं रुकी। बता दें कि कंपनी ने ताबड़तोड़ स्टोर खोलने शुरू कर दिए। साल 2011 में मालाबार ने रियाद में अपना 50वां स्‍टोर खोला। तब तक कंपनी का टर्नओवर 12 हजार करोड़ रुपये पहुंच चुका था। 2013 तक आते-आते कंपनी ने 7 देशों में कुल 103 आउटलेट खोल दिए। इसके अलावा भारत और UAE में फैक्‍ट्री भी स्‍थापित हो गई। 2017 में कंपनी ने दुबई में अपना 200वां स्‍टोर खोला, जबकि 12 जनवरी 2018 को कंपनी ने एकसाथ 6 देशों में 11 स्‍टोर खोले। अगले साल यानी 2019 में कंपनी ने अमेरिका के शिकागो में भी स्टोर खोले।

छोटी शुरुआत से हजारों करोड़ का कारोबार

रिपोर्टेस में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, Malabar Gold & Diamonds के 14 देशों में 445 से ज्यादा स्टोर हो चुके हैं और कंपनी का सालाना टर्नओवर 27,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

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