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मक्का से बनने वाले एथेनॉल की कीमत ₹3 प्रति लीटर घटी! डिस्टिलरी कंपनियां नाराज; चीनी उद्योग ने क्यों किया फैसले का समर्थन?

Published: Wed, 21 Oct 2026 07:04 PM (IST)

मक्का से एथनॉल बनाने वाली कंपनियों ने तेल विपणन कंपनियों द्वारा खरीद मूल्य में ₹3 प्रति लीटर की कटौती पर ...और पढ़ें

अनाज आधारित एथनॉल की कीमत में कटौती (AI Image)

अनाज आधारित एथनॉल की कीमत में कटौती (AI Image)

HighLights

  1. मक्का आधारित एथनॉल की खरीद कीमत ₹3 प्रति लीटर घटी।

  2. डिस्टिलरी कंपनियों ने सरकार के इस फैसले पर जताई नाराजगी।

  3. चीनी उद्योग ने कटौती का समर्थन किया, पर प्राथमिकता पर चिंता।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मक्का से एथनॉल बनाने वाली कंपनियों ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए मक्का आधारित एथनॉल की खरीद कीमत में ₹3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। दूसरी ओर, चीनी उद्योग ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है, लेकिन एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए विशेष रूप से स्थापित प्लांट्स को प्राथमिकता देने पर चिंता जताई है।

एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम शुरू होने के बाद पहली बार तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने मक्का से बनने वाले बायो फ्यूल की खरीद कीमत घटाई है। हालांकि, एथनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2022-23 के दौरान मक्का आधारित एथनॉल की शुरुआती खरीद कीमत कम थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया था। अब इसमें फिर से कटौती की गई है।

कीमतों पर क्या है सरकार का स्टैंड?

एथनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए सी-हेवी शीरे (CHM) और टूटे चावल से बनने वाले एथनॉल की खरीद कीमतें क्रमशः ₹57.97 प्रति लीटर और ₹64 प्रति लीटर पर बरकरार रखी गई हैं। ये दरें 2025-26 में भी इतनी ही थीं। वहीं, भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से बेचे जाने वाले चावल से बनने वाले एथनॉल की खरीद दर में ₹1.82 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।

एथनॉल सप्लाई वर्ष 2023-24 की तरह, जब गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे (BHM) से बनने वाले एथनॉल पर प्रतिबंध के कारण सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई थीं, इस बार भी सरकार ने 2026-27 के लिए इनकी कीमतें घोषित नहीं की हैं। सरकार ने घोषणा की है कि तेल विपणन कंपनियां गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद नहीं करेंगी।

एथनॉल खरीद के लिए पहला टेंडर जारी

तेल विपणन कंपनियों ने एथनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर से अक्टूबर) के दौरान विभिन्न कच्चे माल से बनने वाले एथनॉल की खरीद के लिए पहला टेंडर (साइकिल-1) जारी किया है। इसके तहत कुल 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल खरीदा जाएगा। पहली और दूसरी तिमाही में 300-300 करोड़ लीटर तथा तीसरी और चौथी तिमाही में 250-250 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद प्रस्तावित है।

मीडिया सूत्रों ने बताया कि अनाज आधारित डिस्टिलरी कंपनियों ने NAFED के माध्यम से शुरू की गई सरकार की मक्का के लिए सुनिश्चित MSP की व्यवस्था का कभी समर्थन नहीं किया। इसकी वजह यह थी कि जब बाजार में मक्का की कीमत सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से कम होती थी, तब कंपनियां MSP पर मक्का खरीदने के लिए तैयार नहीं थीं।

सूत्रों के मुताबिक, एथनॉल की कीमत मक्का के प्रचलित बाजार भाव और उससे एथनॉल प्राप्त होने की औसत मात्रा के आधार पर तय की गई थी। इसलिए कीमत में कटौती की उम्मीद करना भी स्वाभाविक था। उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग को ऐसी सुविधा नहीं मिलती, क्योंकि चीनी मिलों को गन्ना किसानों को कम से कम उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) का भुगतान करना होता है, जो हर साल बढ़ाया जाता है।

2022-23 में दो बार बढ़ानी पड़ी थी कीमत

2022-23 के दौरान अनाज आधारित डिस्टिलरी कंपनियों के दबाव के कारण सरकार को सीजन के बीच में दो बार एथनॉल की खरीद कीमत बढ़ानी पड़ी थी। उस समय मक्का की बाजार कीमतें बढ़ने के कारण प्लांट्स ने नुकसान का हवाला देते हुए मोबिलाइजेशन बंद कर दिया था।

ग्रेन एथनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) के अध्यक्ष सीके जैन ने एक बयान में जानकारी देते हुए बताया कि, “एक संतुलित एथनॉल नीति में मक्का और चावल दोनों से एथनॉल के प्रेक्टिलक प्रोडक्शन को समर्थन मिलना चाहिए। खरीद कीमतों में दोनों की अलग-अलग लागत स्ट्रक्चर को ध्यान में रखा जाना चाहिए और प्रोड्यूसर्स को अलॉटमेंट के मामले में उचित भरोसा मिलना चाहिए। मक्का से एथनॉल बनाने के प्रोत्साहन को कम करना, जबकि कम कीमत पर चावल आधारित एथनॉल उपलब्ध है, मक्का आधारित उत्पादन की आर्थिक प्रेक्टिलक और किसानों के लिए पैदा होने वाले बाजार को कमजोर करने का जोखिम पैदा करता है।”

ये भी पढ़ें: अब गन्ने से नहीं बनेगा इथेनॉल? सरकार ने 2026-27 के लिए तय किया जीरो डायवर्जन, चीनी की सप्लाई बनाए रखने के लिए नया प्लान

जैन ने आगे कहा कि सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कीमतों और आवंटन की एक साथ रिव्यू करना चाहिए, क्योंकि इंडस्ट्री की अपने इन्वेस्टमेंट को बनाए रखने और अनाज की खरीद जारी रखने की क्षमता दोनों पर निर्भर करती है। अतिरिक्त चावल का इस्तेमाल एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम में मदद कर सकता है, लेकिन इससे मक्का को बढ़ावा देने के प्रयास कमजोर नहीं होने चाहिए।”

चीनी उद्योग ने सी-हेवी शीरे की कीमत बढ़ाने की मांग की

चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के MD दीपक बल्लानी ने सी-हेवी शीरे से बनने वाले एथनॉल की खरीद कीमत बढ़ाकर ₹62.23 प्रति लीटर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एथनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के मौजूदा टेंडर में लॉन्ग टर्म खरीद समझौते (LTOA) वाले विशेष एथनॉल प्लांट्स (DEPs) को पहले से ही प्राथमिकता दी गई है। यदि आने वाले सालों में भी यह प्राथमिकता जारी रहती है, तो इससे चीनी उद्योग के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।”

प्रतिबंधों को ISMA का समर्थन

उन्होंने कहा कि विशेष एथनॉल संयंत्रों को लगातार प्राथमिकता देना एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम शुरू करने के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा। इस कार्यक्रम का एक उद्देश्य चीनी उद्योग की फाइनेंशियल लिक्विटी में सुधार करना और गन्ना किसानों के बकाये का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी है।

गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए ISMA ने कहा कि देश में चीनी की घरेलू खपत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खासकर इस सीजन में, जब अल नीनो की उभरती परिस्थितियों और प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता से फसल की पैदावार और चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।