ये है देश का सबसे अमीर गांव, जहां हर घर में मिलेंगे NRI; बैंकों में हैं लोगों के 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा!
World Richest Village: गुजरात के कच्छ जिले में स्थित माधापर भारत का सबसे अमीर गांव है, जहां 19 बैंक और ...और पढ़ें

ये है देश का सबसे अमीर गांव जहां हर घर में है NRI
HighLights
माधापर गांव में 19 बैंक और 8000 करोड़ से अधिक जमा।
65% परिवार NRI से जुड़े, विदेशी धन से समृद्धि।
गांव में स्कूल, अस्पताल जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: 'गांव' शब्द सुनते ही अक्सर हमारे जहन में कच्ची सड़कों, खेती-किसानी और सीमित सुविधाओं की तस्वीर उभरती है। लेकिन आज आपकी ये गलतफहमी दूर हो जाएगी क्योंकि भारत में एक ऐसा गांव है, जिसने इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। बता दें कि यहां के लोगों के पास सिर्फ पक्के मकान ही नहीं बल्कि बैंक खातों में करोड़ों की रकम भी है।
यही वजह है कि इस गांव को देश यानी दुनिया का सबसे अमीर गांव (World Richest Village) कहते हैं। दरअसल इस विलेज का नाम है माधापर। यह गुजरात (Gujarat) के कच्छ जिले में है। रेगिस्तान के करीब बसे इस गांव में लोगों का रहन-सहन किसी हाई-टेक शहर से कम नहीं है। माधापर (Madhapar) की इस बेहिसाब समृद्धि और तरक्की की चर्चा आज सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में होती है।
19 बैंक, ₹8000 करोड़ और हजारों पक्के घर
दरअसल इस गांव की सबसे बड़ी खासियत है कि इसकी आर्थिक मजबूती। बता दें कि माधापर गांव में करीब 19 बैंक हैं, जो किसी छोटे शहर में भी कम ही देखने को मिलते हैं। इस गांव में 7,600 से अधिक पक्के मकान भी हैं। इसके साथ ही यहां रहने वाले लोगों के बैंक खातों में बड़ी रकम भी जमा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार इस गांव के लोगों के बैंकों में 8000 करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं।
ये खासियत यही नहीं रुकती, बता दें कि गांव के कई परिवार आर्थिक रूप से इतने मजबूत हैं कि उनके बैंक खातों में औसतन लाखों रुपये जमा हैं। इसके साथ ही माधापर में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पार्क, झील, मंदिर और गौशाला जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी मौजूद हैं। यानी सुविधाओं के मामले में यह गांव कई शहरों को भी टक्कर दे सकता है।
कैसे अमीर बना यह गांव?
इन सारी जानकारियों को पढ़ने के बाद आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर माधापर दुनिया का सबसे अमीर गांव बना कैसे? बता दें इस गांव का अमीर बनने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां के लोगों का विदेशी जुड़ाव होना। दरअसल करीब 80 हजार की आबादी वाले इस गांव के बड़ी संख्या में लोग कई दशक पहले रोजगार और कारोबार के लिए विदेश चले गए थे। आज गांव के लगभग 65% परिवारों का संबंध NRI से जुड़ा है। इनमें से कई लोग ब्रिटेन, अमेरिका, अफ्रीका और खाड़ी (गल्फ) देशों में रहते हैं। विदेश में रहकर ये लोग नियमित रूप से अपने परिवारों को पैसे भेजते हैं, जिससे गांव की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत होती गई। इतना ही नहीं, कई NRI सालों तक विदेश में सफल कारोबार करने के बाद वापस माधापर लौट आए हैं।
इस गांव के लोगों की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने अपने गांव से रिश्ता नहीं छोड़ा। और इसी सोच को मजबूत करने के लिए 1968 में लंदन में ‘माधापर विलेज एसोसिएशन’ की स्थापना की गई थी। इस संगठन का सबसे बड़ा उद्देश्य यह था कि वे विदेश में रहने वाले गांव के लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर रखना चाहते थे। बाद में इसका एक कार्यालय माधापर में भी खोला गया।
कहां से होती है कमाई?
इतनी बेहिसाब दौलत होने के बावजूद माधापर के लोगों ने अपनी मिट्टी और परंपराओं से नाता नहीं तोड़ा है। आज भी इस गांव में आजीविका का मुख्य आधार खेती ही है। यहां पैदा होने वाले कृषि उत्पाद मुंबई सहित देश के कई महानगरों में सप्लाई किए जाते हैं।
