50 लाख के ऊपर और मिलेगी मदद? PM मोदी से अंतरिम फंडिंग की मांग; NPRD में 164 गंभीर बीमारियों के लिए मिलती है यह हेल्प
लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स सपोर्ट सोसाइटी (LSDSS) ने सरकार से अनुरोध किया है कि दुर्लभ बीमारियों के उन मरीजों के लिए ...और पढ़ें

फाइल फोटो
HighLights
LSDSS ने PM मोदी से अंतरिम फंडिंग की मांग की।
NPRD के तहत 50 लाख की सहायता राशि खत्म हुई।
164 दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे मरीजों का इलाज जारी रखने का आग्रह।
नई दिल्ली। लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर्स सपोर्ट सोसाइटी (LSDSS) ने सरकार से अनुरोध किया है कि वे उन मरीजों के लिए फंडिंग की कोई अंतरिम व्यवस्था करें, जिनकी 'नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिसीज़' (NPRD) के तहत मिलने वाली 50 लाख रुपये की सहायता राशि खत्म हो चुकी है, ताकि उनका जीवन बचाने वाला इलाज जारी रह सके। लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (LSD) बहुत ही दुर्लभ आनुवंशिक मेटाबोलिक विकार हैं। इनमें शरीर की कोशिकाओं के भीतर एंजाइम की कमी के कारण कई तरह के विषाक्त पदार्थ असामान्य रूप से जमा होने लगते हैं।
2010 में स्थापित, LSDSS एक नॉन-प्रॉफिटेबल ऑर्गेनाइजेशन है जो भारत में LSD और अन्य दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के कल्याण के लिए काम करता है।
PM को लिखा खत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को लिखे एक पत्र में, LSDSS ने कहा, "हम एक तत्काल मानवीय कदम उठाने का आग्रह करते हैं: ऐसे सभी चिकित्सकीय रूप से पात्र मरीज, जिनका इलाज केवल इसलिए रुक गया है क्योंकि 'नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिसीज (NPRD), 2021' के तहत मिलने वाली 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता खत्म हो चुकी है, उन्हें उनके जीवन रक्षक इलाज को जारी रखने या फिर से शुरू करने के लिए कोई अंतरिम व्यवस्था दी जाए। यह व्यवस्था तब तक बनी रहनी चाहिए जब तक कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला पूरी तरह से सुलझ न जाए।"
16 अक्टूबर 2026 के पत्र में कहा गया है कि यह अपील न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि इस प्रक्रिया में लगने वाले समय की वजह से मरीजों को नुकसान न उठाना पड़े। LSDSS ने बताया कि 164 मरीजों ने NPRD, 2021 के तहत मिलने वाली 50 लाख रुपये की सहायता राशि पूरी तरह खर्च कर ली है। इनमें से लगभग 115 मरीज ऐसे हैं जो बेहद दुर्लभ LSD (लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर) से पीड़ित हैं, जिनमें गौचर (Gaucher) और पॉम्पे (Pompe) बीमारी शामिल हैं।
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इनमें से कई मरीजों के लिए, इलाज कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं है। पत्र में कहा गया है कि यह देखभाल की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें आगे बताया गया है कि जिन मामलों में चिकित्सकीय रूप से जरूरी हो, वहां 'एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी' (ERT) को नियमित रूप से दिया जाना चाहिए, ताकि इलाज से मिले फायदों को बनाए रखा जा सके और बीमारी को और आगे बढ़ने से रोका जा सके।
