Litchi Price Hike: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लीची उत्पादक देश भारत; निर्यात भी नाममात्र, फिर क्यों महंगी बिक रही लीची?
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के डॉयरेक्टर डॉ बिकास दास ने भारत में लीची के कुल उत्पादन और निर्यात के आंकड़े बताए हैं।

लीची की के उत्पादन और निर्यात के बीच बड़ा गैप (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
भारत दूसरा सबसे बड़ा लीची उत्पादक देश है।
कम उत्पादन और निर्यात से लीची महंगी हुई।
कम शेल्फ लाइफ निर्यात में मुख्य बाधा है।
नई दिल्ली| लीची गर्मी के दिनों में मिलने वाले खास फलों में शामिल है। पानीदार फल होने के कारण लीची हाइड्रेट रखने का अच्छा सोर्स है, जिसके चलते गर्मियों में इसकी बाजार मांग खूब बनी रहती है। भारत में लीची का उत्पादन भी बड़े पैमानें पर होता है। बंपर उत्पादन के बाद भी लीची का निर्यात नाममात्र का है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के डॉयरेक्टर डॉ बिकास दास ने जागरण बिजनेस से बातचीत कर खास जानकारी दी।
किन राज्यों में होती है सबसे अधिक लीची ?
भारत में करीब 7.2-8 लाख टन लीची का उत्पादन होता था, लेकिन पिछले साल लीची के उत्पादन में भारी गिरावट देखी गई। डॉ. बिकास ने जागरण बिजनेस को जो आंकड़े बताए उसके अनुसार पूरे देश में बीते साल करीब 1 लाख हेक्टेयर में लीची की खेती की गई और 05 लाख टन उत्पादन रहा।
राज्यों के हिसाब से बात अभी भी बिहार लीची उत्पादन में टॉप पर है। बिहार में 1 लाख 36 हजार टन उत्पादन हुआ। डॉ. दास ने नए आंकड़ों के अनुसार बातया कि पंजाब में अच्छा लीची का उत्पादन बढ़ा और प्रोडक्शन 75 हजार टन हुआ। अगला नाम बंगाल का है जहां 73 लाख टन उत्पादन हुआ। इसके बाद झारखंड का नाम आता है जहां 63 हजार टन पैदावार हुई। असम में 62 और छत्तीसगढ़ में 61 हजार टन पैदावार हुई।
निर्यात में क्यों पीछे रह गई लीची?
पूरी दुनिया में लीची उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहने वाला भारत ने पिछले साल सिर्फ 25 करोड़ की लीची का निर्यात किया। लीची एक्सपोर्ट में कमी का कारण बताते हुए उन्होंने जानकारी दी की लीची की सेल्फ लाइफ अधिकतम 2 दिन होती है। हम अपने सीमित कोल्ड चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके मिडिल ईस्ट तक ही अपना निर्यात कर पाते हैं। घरेलू बाजार में अधिक मांग, कोल्ड चेन, और कई देशों में निर्यात से जुड़े नियमों की वजह से लीची का निर्यात कम होता है।
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इस साल क्यों महंगी हुई लीची?
देश के प्रमुख महानगरों में लीची की कीमत में पिछले साल के मुकाबले अधिक उछाल देखा गया है। बता दें कि देश में लीची के उत्पादन में कमी आई है और बाजार मांग तेज हुई है। बढ़ती मांग और प्रोडक्शन में कमी के कारण घरेलू बाजार में लीची की कीमत तेजी से बढ़ी है।
