Pepsi को भारत में क्यों कहा जाता था 'लहर पेप्सी'? समय के साथ गायब हो गया ये नाम; पढ़ें दिलचस्प कहानी
एक समय भारत में 'लहर पेप्सी' के नाम से मशहूर यह ब्रांड 1990 के दशक की आर्थिक नीतियों का परिणाम ...और पढ़ें

HighLights
पेप्सी को कहा जाता था लहर पेप्सी
1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद 'लहर' शब्द हटाया
नियमों के चलते जोड़ा था लहर शब्द
नई दिल्ली। आज भारत में पेप्सी का नाम सुनते ही एक ग्लोबल सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड की छवि सामने आती है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसे "लहर पेप्सी" (Lehar Pepsi) के नाम से जाना जाता था। 1990 के दशक में यह नाम लगभग हर भारतीय के लिए परिचित था। बहुत से लोग आज भी पुरानी यादों में "लहर पेप्सी" का जिक्र करते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि आखिर पेप्सी के साथ "लहर" क्यों जोड़ा गया था और बाद में इसे क्यों हटा दिया गया। इसकी कहानी भारत की आर्थिक नीतियों, विदेशी कंपनियों के प्रवेश और बदलते कारोबारी माहौल से जुड़ी हुई है।
भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर एंट्री
भारत में 1980 के दशक के अंत तक विदेशी कंपनियों के लिए सीधे कारोबार करना आसान नहीं था। उस समय सरकार ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए कई शर्तें तय कर रखी थीं। ऐसे माहौल में पेप्सी ने भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए एक स्थानीय साझेदारी का रास्ता चुना।
कंपनी ने भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर कारोबार शुरू किया, जिसमें बेवरेजेज प्रोडक्ट्स के साथ कृषि और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े निवेश का भी वादा किया गया। इसी जॉइंट वेंचर के कारण पेप्सी को एक भारतीय पहचान देने की जरूरत महसूस हुई। यहीं से "लहर" नाम सामने आया।
लहर ब्रांड पहले से था मौजूद
उस दौर में जॉइंट वेंचर से जुड़े भारतीय कारोबार के तहत "लहर" ब्रांड पहले से मौजूद था, जिसका इस्तेमाल फूड और बेवरेज प्रोडक्ट्स के लिए किया जाता था। पेप्सी को भारतीय बाजार में उतारते समय उसके साथ "लहर" जोड़ दिया गया और वह "लहर पेप्सी" के नाम से बिकने लगी।
इससे यह संदेश भी गया कि यह उत्पाद भारतीय साझेदारी के साथ बाजार में आया है। उस समय टीवी विज्ञापनों, होर्डिंग्स और दुकानों पर यही नाम प्रमुखता से दिखाई देता था, जिससे यह आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया।
हटाना शुरू किया लहर शब्द
फिर 1991 के बाद भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत हुई और विदेशी निवेश के नियम धीरे-धीरे आसान होने लगे। बदलती नीतियों के साथ पेप्सी की भारतीय यूनिट की इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बदलाव आया। कंपनी को अपना वैश्विक ब्रांड अधिक मजबूती से पेश करने का अवसर मिला।
ऐसे में "लहर" नाम की जरूरत पहले जैसी नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जैसी पहचान बनाने की रणनीति के तहत कंपनी ने धीरे-धीरे पैकेजिंग, विज्ञापनों और ब्रांडिंग से "लहर" शब्द हटाना शुरू कर दिया।
हर देश में पेप्सी का एक ही नाम
इसके पीछे एक बड़ा कारण मार्केटिंग भी था। दुनिया के लगभग हर देश में पेप्सी एक ही नाम से जानी जाती थी। अलग-अलग देशों में अलग नाम रखने से ब्रांड की एकरूपता प्रभावित होती थी। इसलिए कंपनी ने भारत में भी केवल "पेप्सी" नाम को आगे बढ़ाया।
इससे वैश्विक विज्ञापन अभियानों, खेल प्रायोजन और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का प्रभाव भी ज्यादा मजबूत हुआ। उपभोक्ताओं के लिए भी यह वही ब्रांड बन गया, जिसे वे दुनिया के अन्य देशों में देखते थे।
"लहर पेप्सी" नाम बना इतिहास
आज "लहर पेप्सी" नाम इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन यह भारतीय आर्थिक बदलाव के दौर की एक दिलचस्प याद भी है। यह नाम केवल एक ब्रांडिंग प्रयोग नहीं था, बल्कि उस समय की सरकारी नीतियों और कारोबारी परिस्थितियों का परिणाम था। जैसे-जैसे भारत का बाजार वैश्विक कंपनियों के लिए खुलता गया, वैसे-वैसे "लहर" की भूमिका खत्म होती गई और केवल "पेप्सी" नाम ही स्थापित हो गया।
यही वजह है कि आज नई पीढ़ी शायद "लेहर पेप्सी" को न जानती हो, लेकिन 1990 के दशक के लोगों के लिए यह नाम आज भी यादगार है।
