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"3 प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों का होना जरूरी..." Vi की कमान फिर बिड़ला के हाथ; ₹47533 करोड़ के दांव से पलटेंगे बाजी!

Published: Wed, 06 May 2026 08:51 AM (IST)Updated: Wed, 06 May 2026 12:51 PM (IST)

कुमार मंगलम बिड़ला को वोडाफोन आइडिया (Vi) का नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन फिर से नियुक्त किया गया है। यह फैसला Vi के ...और पढ़ें

HighLights

  1. बिड़ला Vi के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त

  2. कंपनी ₹25,000 करोड़ का कर्ज जुटाने की तैयारी में

  3. सरकार के राहत पैकेज से Vi को मिली बड़ी मदद

नई दिल्ली। कुमार मंगलम बिड़ला को वोडाफोन आइडिया (Vi) का नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है। वीआई जियो और एयरटेल से कड़े मुकाबले और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया जैसी रेगुलेटरी देनदारियों के कारण कई सालों से चल रहे वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रही है और इसी बीच ये फैसला लिया गया है। बिड़ला के अनुसार, “भारत में टेलीकॉम के अवसर बेहद आकर्षक बने हुए हैं, जो सरकार के साहसी ‘डिजिटल इंडिया’ विन पर आधारित हैं।”
“वोडाफोन आइडिया का रिवाइवल एक स्वस्थ, तीन-कंपनियों वाले प्राइवेट मार्केट को बनाए रखने के स्पष्ट इरादे को दिखाता है; जिसे 10,000 से अधिक कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और लगभग 20 करोड़ उपभोक्ताओं के लगातार विश्वास से और भी सपोर्ट मिला है।”

47533 करोड़ रुपये का दांव खेला जाएगा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन ने आगे कहा कि Vi के ऑपरेशनल मेट्रिक्स में अब साफ सुधार दिखने लगा है। बिड़ला ने कहा, "इस रफ्तार को लगभग $5 बिलियन (47533 करोड़ रुपये) के एक बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्रोग्राम का भी साथ मिल रहा है।"
उन्होंने कहा कि "मुझे पूरा भरोसा है कि Vodafone Idea भारत के टेलीकॉम सेक्टर को आकार देने और देश के बड़े डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाएगी।"

किसकी जगह लेंगे बिड़ला?

बिड़ला, Vodafone Group के अनुभवी अधिकारी रविंदर टक्कर की जगह लेंगे। टक्कर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर काम करते रहेंगे और वाइस चेयरमैन का पद संभालेंगे।
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, ये बदलाव 5 मई से लागू होंगे और कंपनी के बोर्ड ने इन्हें मंजूरी दे दी है।

क्यों दिया था बिड़ला ने इस्तीफा?

बता दें कि साल 2021 में, कंपनी पर आए आर्थिक संकट के चलते बिड़ला ने नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार के एक राहत पैकेज ने कंपनी को बचाने में मदद की है। इस पैकेज में बकाया रकम को इक्विटी में बदलना, कुछ समय के लिए भुगतान पर रोक (moratorium) लगाना, और हाल ही में बकाया रकम की दोबारा कैलकुलेशन करके उसे कम करना शामिल है।
अब जब कंपनी मुश्किलों से बाहर निकल आई है, तो इस नियुक्ति को निवेशकों और कर्ज देने वालों का भरोसा बढ़ाने की एक कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Vi ₹25,000 करोड़ का कर्ज जुटाने की कोशिश कर रही है, और उसका लक्ष्य अगले तीन सालों में अपनी सालाना कमाई (revenue) में दो अंकों की बढ़ोतरी करना और EBITDA को तीन गुना बढ़ाना है।

वीआई को मिली कोर्ट से राहत

Vi, जो आदित्य बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन ग्रुप का एक जॉइंट वेंचर है, का गठन 2016 में Reliance Jio के आने के बाद शुरू हुई 'टैरिफ वॉर' (कीमतों की होड़) का मुकाबला करने के लिए किया गया था। लेकिन, बाजार में हिस्सेदारी के मामले में भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vi पर तब दबाव बढ़ गया, जब 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने AGR बकाया को लेकर अपना फैसला सुनाया।
अब पिछले महीने, सरकार ने Vi के AGR बकाया को 27% घटाकर ₹64,046 करोड़ कर दिया और कंपनी को बकाया चुकाने के लिए 10 साल की मोहलत (moratorium) दी, जिससे कंपनी को कैश फ्लो (नकदी के प्रवाह) के मामले में काफी राहत मिली है।

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