सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

IDBI बैंक को खरीदने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक और दुबई की इस कंपनी में मुकाबला, कनाडाई अरबपति भी लगा जुगाड़ में

Published: Sat, 07 Feb 2026 09:09 AM (IST)

आईडीबीआई बैंक के विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment) की प्रक्रिया में तेजी आई है। कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स ...और पढ़ें

आईडीबीआई बैंक का होगा विनिवेश

आईडीबीआई बैंक का होगा विनिवेश

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। जल्द ही आईडीबीआई बैंक का विनिवेश (IDBI Bank Disinvestment Update) हो सकता है। इस स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने फाइनेंशियल बोलियां जमा की हैं। एमिरेट्स NBD दुबई की सरकारी कंपनी है, जबकि फेयरफैक्स इंडिया भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी है। शॉर्टलिस्ट किए गए बिडर्स द्वारा सबमिट की गई तीनों फाइनेंशियल बिड का अब वैल्यूएशन किया जाएगा। फाइनल सिलेक्शन सिर्फ प्राइस के आधार पर नहीं होगा, बल्कि कई क्वालिटेटिव और रेगुलेटरी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा।

बिड्स का किया जाएगा वैल्यूएशन

इससे पहले, डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने फाइनेंशियल बिड्स मिलने की पुष्टि की थी। DIPAM सेक्रेटरी ने 6 फरवरी को सोशल मीडिया के जरिए कहा था कि IDBI बैंक के स्ट्रेटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट के लिए फाइनेंशियल बिड्स मिल गई हैं। इनका तय प्रोसेस के अनुसार वैल्यूएशन किया जाएगा।
शॉर्टलिस्ट किए गए बोली लगाने वालों से फाइनल फाइनेंशियल ऑफर मिलने के बाद ट्रांजैक्शन अपने निर्णायक इवैल्यूएशन फेज में चला जाता है।

सरकार और LIC बेचेगी हिस्सेदारी

इस स्ट्रैटेजिक सेल में बैंक में अधिकांश हिस्सेदारी के साथ-साथ मैनेजमेंट कंट्रोल का ट्रांसफर भी शामिल है। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर IDBI बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं, जिसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
यह विनिवेश केंद्र सरकार के बड़े स्ट्रैटेजिक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका मकसद नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाना और नॉन-कोर सेक्टर में अपनी मौजूदगी कम करना है।

मार्च 2021 में विनिवेश प्रक्रिया में आई तेजी

IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया में मार्च 2021 में तेजी आई, जब एसेट क्वालिटी, कैपिटल एडिक्वेसी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के बाद बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क से बाहर निकल गया। PCA से बाहर निकलना प्राइवेट इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने और स्ट्रैटेजिक सेल में दिलचस्पी फिर से जगाने के लिए एक जरूरी शर्त थी।

ये भी पढ़ें - US-India Trade Deal: ट्रंप ने भारतीय एक्सपोर्ट पर हटाया 25% टैरिफ, जारी किया ऑर्डर; भारत नहीं खरीदेगा रूसी तेल