नई दिल्ली (शुभम शंखधर)। पांच तिमाहियों के बाद आर्थिक विकास दर में गिरावट का सिलसिला थम गया। वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 फीसद रही। ग्रोथ रेट में आई इस बढ़ोत्तरी का श्रेय निश्चित तौर पर मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर को जाता है। लेकिन कृषि, सेवा और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में अभी सुधार दिखना बाकी है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आंकड़ों में यह तरक्की देश की अर्थव्यस्था और आम आदमी के जीवन पर क्या असर डालेगी। साथ ही क्षेत्रवार इन आंकडों का क्या मतलब है। अपनी इस खबर में हम आपको तमाम एक्सपर्ट से बात करके यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस जटिल आर्थिक आंकड़ों का सरोकार हमारे जीवन से कैसे है।

पहले पांच महीने बाद थमी गिरावट की एक झलक
वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.9 फीसद पर थी जो तिमाही आधार पर गिरते गिरते वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में 5.7 के स्तर पर आ गई थी। इसकी मुख्य वजह नोटबंदी और जीएसटी की अनिश्चितता रही। दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट में गिरावट का सिलसिला थमा और विकास दर 6.3 फीसद रही।

क्या है इस उछाल का मतलब
राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान की सलाहकार और अर्थशास्त्री राधिका पांडे के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ रेट में आए उछाल का सीधा मतलब यह है कि जीएसटी और नोटबंदी का असर काफी हद तक कम हो गया है। राधिका के मुताबिक बीती तिमाही में आई गिरावट ग्रोथ रेट के लिहाज से निचला स्तर था, आने वाली तिमाहियों में आर्थिक विकास दर में और सुधार देखने को मिल सकता है।

जीडीपी के अलग अलग सेक्टर का क्या हाल
जीडीपी ग्रोथ रेट में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है। वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ रेट 1.2 फीसद थी जो इस तिमाही 7 फीसद पर पहुंच गई। इसके अलावा माइनिंग क्षेत्र जो पहली तिमाही में (-)0.7 फीसद के स्तर पर था दूसरी तिमाही में 5.5 फीसद के स्तर पर पहुंच गया।


मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्यों आया उछाल?
राधिका ने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेजी का सीधा मतलब यह है कि जो कंपनियां जीएसटी पर अनिश्चितता से पहले स्टॉक खाली (डी-स्टॉकिंग) कर रही थी, वे अब वापस स्टॉक्स (रि-स्टॉकिंग) को भरने लगी हैं। राधिका के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 7 फीसद की दर से बढ़ोतरी काफी अच्छी है। देखने वाली बात होगी कि आने वाली तिमाहियों में यह जारी रहती है या नहीं क्योंकि दिवाली के आसपास त्यौहारी सीजन में लोग खरीदारी करते हैं, ऐसे में कहीं यह तेजी में बड़ी हिस्सेदारी उसकी तो नहीं।

मैन्युफैक्चरिंग में तेजी का आम आदमी को क्या फायदा?
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर अगर टिकाऊ है तो निश्चित तौर यह रोजगार के मोर्चे पर एक अच्छा संकेत हो सकता है। रोजगार में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बड़ा योगदार है। ऐसे में अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ोतरी होती है तो आने वाले दिनों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इस सेक्टर में ग्रोथ का दूसरा बड़ा फायदा यह है कि संगठित अर्थव्यवस्था का दायरा धीरे धीरे बढ़ रहा है। अन-ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर का ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर की दिशा में बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। दरअसल, जीएसटी के आने के बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा लेने के लिए व्यापार का संगठित क्षेत्र का हिस्सा बनना अनिवार्य है।

माइनिंग सेक्टर में उछाल का कारण और असर
वी एम फाइनेंनशियल के हेड (रिसर्च) विवेक मित्तल के मुताबिक माइनिंग में उछाल का मुख्य कारण कोयला उत्पादन में तेजी रही। मैन्युफैक्चरिंग की तरह ही माइनिंग क्षेत्र भी अर्थव्यवस्था के लिहाज से सकारात्मक है। माइनिंग गतिविधियों में तेजी का सीधा संबंध ऑटो और ट्रांस्पोर्ट फाइनेंस सेक्टर से होता है, ऐसे में आने वाले समय में अगर माइनिंग में तेजी देखने को मिलती है तो इसका फायदा इस क्षेत्रों को मिलेगा।

कृषि क्षेत्र में गिरावट का कारण

कृषि क्षेत्र में दिख रही इस गिरावट की मुख्य वजह खरीफ फसलों के दौरान बारिश का सामान्य से कम होना रहा। हालांकि कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा के मुताबिक तिमाही आधार पर कृषि क्षेत्र की जीडीपी का विश्लेषण करना गलत है। उनके मुताबिक भारत में की भी फसल तीन महीने की नहीं होती ऐसे में यह अनुमान लगाना ठीक नहीं। कृषि क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा नोटबंदी और जीएसटी के बाद किसानों की हालत खराब है। किसी भी फसल का किसानों को सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। लेकिन चूंकि जीडीपी की गणना बुआई का क्षेत्र और पैदावार के लिहाज से होती है और पैदावार अच्छी रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यहां सुधार देखने को मिल सकता है।

सेवा क्षेत्र में सुस्ती लेकिन सुधार की उम्मीद
जीडीपी में सेवा क्षेत्र का आकलन मुख्यत: तीन तरह की सेवाओं से किया जात है। पहली ट्रेड, होटल ट्रांस्पोर्ट और कम्युनिकेशन क्षेत्र की सेवाएं। दूसरा वित्तीय, इंश्योरेंस, रियल इस्टेट और पेशेवर सेवाएं और तीसरा सरकारी और रक्षा संबंधी सेवाएं। जैसा आप ऊपर चार्ट में देख पा रहे हैं कि इस तिमाही में इन तीनों ही क्षेत्र की सेवाओं में बढ़ोतरी की रफ्तार मंद पड़ी है। लेकिन राधिका पांडे का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में निश्चित तौर पर इनमें सुधार देखने को मिलेगा। नोटबंदी औक जीएसटी के बाद सुस्त पड़ी बिजनेस एक्टिविटी तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर असंगठित क्षेत्र का व्यवसाय तेजी से संगठित क्षेत्र में शामिल हो रहा है। इसका असर आने वाली तिमाही में दिखेगा। इस तिमाही में आई आई सुस्ती की असर वजह भी यही है।

वित्तीय, इंश्योरेंस और रियल इस्टेट सेवाओं में सुस्ती का सीधा संबंध क्रेडिट ग्रोथ, डिपॉजिट ग्रोथ से होता है। उम्मीद है कि आने वाले समय में निजी क्षेत्र से निवेश बढ़ेगा जिससे इस क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

सस्ते कर्ज की उम्मीद को लग सकता है झटका
एस्कॉर्ट्स सिक्योरिटी के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल का मानना है कि जीडीपी ग्रोथ रेट में उछाल आने के बाद आरबीआई की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम हो जाती है। इसका एक बड़ा कारण खाद्य महंगाई में जारी तेजी भी है। महंगाई बढ़ने की आशंका और ग्रोथ रेट में आया उछाल दोनो ही कारक सस्ते कर्ज की उम्मीद को झटका देते हैं।

Posted By: Surbhi Jain

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