नई दिल्‍ली, ब्रांड डेस्‍क। सूक्ष्म और लघु उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यह अपने उत्पाद का न केवल विदेशों में निर्यात करते हैं, बल्कि अपने आसपास के लोगों को रोजगार देते हैं और उन्हे सशक्त बनाते हैं। ऐसा ही एक लघु बिजनेस है, जयपुर फैब्रिक जिसे जयंत महेश्वरी अपनी पत्नी छवि के साथ मिलकर चलाते हैं। आज जयंत का बिजनेस ऊंचाइयों को छू रहा है और इसमें उनकी मदद राजस्थान के स्थानीय कलाकार और सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक कर रही है।   

दुबई में कॉरपोरेट की जॉब छोड़कर शुरू किया कारोबार 

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयंत महेश्वरी अपनी पत्नी छवि के साथ मिलकर अपना कारोबार चलाते हैं। उनकी पत्नी चार्टड अकाउंटेंट है। दुबई में जॉब करने से पहले वह लंदन में सीएससी नाम की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी करते थे। वहीं से उन्होंने जयपुर और उसकी फैब्रिक की खूबियों के बारे में जाना। जयपुर हेरिटेज और उसकी लेगेसी की पहचान पूरी दुनियाभर में है। जयंत ने भी देखा कि ब्रिटेन के लोग अपने घरों में जयपुर की चीजों खासकर फैब्रिक का इस्तेमाल करते हैं। जैसाकि वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और पहले वह कस्टमर्स के लिए ई-कॉमर्स पर स्टोर बनाते थे, जहां उन्हें कस्टमर्स की सफलता की कहानी के बारे में पता चला। यहीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपना एक स्टोर बनाने के बारे में सोचा। साल 2015 में उन्होंने अपना सपना पूरा किया और जयपुर फैब्रिक्‍स नाम से एक स्टोर बनाया। कुछ समय बाद उनकी पत्नी छवि ने उन्हें ज्वाइन किया।

जयपुर फैब्रिक्स की शुरुआत करने की प्रेरणा

जयपुर के जीतने भी पुराने फैब्रिक्‍स डिजाइन हैं, जैसे बंधेज, लहेरिया, मंगरू और बटिक आदि ये पहले से ही इंग्लैड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलेंड, मध्य एशिया और साउथ अफ्रीका के बाजार में लोकप्रिय थे, लेकिन बी2सी में काम नहीं हो रहा था। जयंत ने इस गैप को देख लिया था और इस पर काम करना शुरू कर दिया। लोगों में जयपुर के फैब्रिक्‍स डिजाइन की मांग बहुत है, उन्होंने बस लोगों के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म तैयार करके दे दिया। इसमें जयपुर के लोगों का बहुत ज्यादा समर्थन मिला है। उनके समर्थन का ही परिणाम है कि जयपुर फैब्रिक को 45 से ज्यादा देशों में निर्यात किया जा रहा है।

व्यवसाय की ग्रोथ के लिए फेसबुक प्लैटफॉर्म को चुना

जयंत और उनकी टीम ने फेसबुक से पहले बहुत सारे प्लैटफॉर्म पर काम किया, इसमें गूगल, याहू, ऑफलाइन एसएमएस जैसे कई सारे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म शामिल हैं। जाहिर तौर पर एक व्यापारी का झुकाव वहीं होगा, जहां से ROAS (Return on ad spend) मिले। उन्होंने देखा कि फेसबुक में रिटर्न ऑन एड स्पेंड बहुत ही अच्छा आ रहा है, इसलिए उन्होंने इसे चुना और इस पर अपना बजट भी बढ़ाया। उधर, फेसबुक ने भी उन्हें बहुत अच्छे टारगेट ऑप्शन दिए। पूरे विश्व में जिस प्रोफाइल के कस्टमर्स तक वह पहुंचना चाहते थे, फेसबुक की मदद से वहां तक वह पहुंच पाए। इसने कस्टमर्स को टारगेट करने में उनकी बहुत ही मदद की।  

कारोबार को नई दिशा देने में फेसबुक की भूमिका 

अगर आपको अपना बिजनेस पता है और आपको पता है कि आपका टारगेट ऑडियंस कौन है, तो सबसे बड़ी चुनौती यह हो जाती है कि उन तक कैसे पहुंचा जाए। कम बजट में असरदार तरीके से अपने कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए जयंत ने सबसे ज्यादा किसी की मदद ली, तो वह फेसबुक है। वह जानते थे कि फेसबुक के पास यूजर्स की संख्या बहुत ज्यादा है और यूजर्स  की टाइम स्पेंडिंग भी अधिक है। उन्होंने धीरे-धीरे फेसबुक की लाइब्रेरी से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने उसके एल्गोरिदम के बारे में जाना और अपने कैंपेन को बेहतर किया। अब उनकी कंपनी काफी अच्छे स्तर पर है, क्योंकि फेसबुक के साथ उनकी ट्यूनिंग बहुत ही अच्छी है और जिस कस्टमर्स को वह ढूंढ़ना चाहते हैं, फेसबुक की मशीन लर्निंग और AI उन्हें ढूंढ़कर दे देती है।    

जयपुर फैब्रिक से जुड़े हुए हैं राजस्थान के कई सारे कलाकार 

जयंत की कंपनी के साथ राजस्थान के कई सारे कलाकार जुड़े हुए हैं, जो काफी सालों से काम कर रहे हैं। उन्हीं में से एक है 90 साल के रामलाल। वह एक पुरस्कार प्राप्त कलाकार हैं, जो कई सालों से सुंदर कठपुतलियां बनाते आ रहे हैं। इस उम्र में रामलाल का जज्बा देखकर जयंत काफी प्रभावित होते हैं। उनकी कंपनी रामलाल से कठपुतलियां खरीदती है और आगे अपने ग्राहकों को फैब्रिक्‍स के साथ इसे कॉम्प्लीमेंट्री फ्री में देती है। इससे कंपनी की ब्रांडिंग हो जाती है और रामलाल जैसे कलाकारों की आय बन जाती है। उसी तरह राजस्थान के बगरू में कई जनरेशन से कई महिलाएं तगाई का काम कर रही हैं। इनके द्वारा बनाई गई रजाई काफी फेमस है। यह खराब नहीं होती और इससे स्मेल भी नहीं आती। जयंत की कंपनी इसपर लाइफटाइम गारंटी देती है। 

कारोबार की बढ़ोतरी में इंस्टाग्राम रील्स की ली मदद 

फेसबुक का इकोसिस्टम, जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सऐप शामिल है, जयंत जैसे छोटे व्यापारियों की काफी मदद कर रहा है। कस्टमर्स को टारगेट करना हो या फिर कैंपेन बनाना हो फेसबुक की मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसमें निर्णायक भूमिका निभाती है। फेसबुक खुद ही निर्णय लेता है कि कौन सी चीज इंस्‍टाग्राम नेटवर्क में दिखाया जाए और कौन सी चीज स्टोरी व रील्स में दिखाई जाए। 

कारोबारी सफर में व्हाट्सएप का योगदान 

जयपुर फैब्रिक बिजनेस के लिए व्हाट्सअप लाइफलाइन रहा है, क्योंकि व्हाट्सअप ऐसा माध्यम है, जिससे हर व्यक्ति आसानी से जुड़ा हुआ है और इसपर हर वर्ग के लोग हैं। इनका टारगेट ऑडियंस युवा और सीनियर सिटीजन हैं, ये सभी व्हाट्सअप इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्सअप हमारे लिए एक CRM (Customer Relationship Management) है। इसके कई सारे फीचर्स हमारी काफी मदद करते हैं। मुझे खुशी है कि यह छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स से जुड़े लोगों के लिए बहुत अच्छा काम कर रहा है।

जयंत से क्या सीख सकते हैं दूसरे कारोबारी 

जयंत मानते हैं कि करोबारी हर चीज का इस्तेमाल करें, लेकिन अपने सफर में उन्हें ऐसे पार्टनर तलाशना चाहिए, जो उनके मुनाफे को बढ़ाए और उनके सारे काम प्रभावशाली तरीके से कर दे। फेसबुक ऐसा पार्टनर है, जो कम लागत में टारगेट ऑडिएंस तक पहुंचाने में हमारी मदद करता है। जयंत की भविष्‍य की योजना यही है कि वह फेसबुक की मदद से अपने बिजनेस को और बढ़ाएं। उन्होंने महामारी के दौरान भी अपनी ग्रोथ दिखाई थी और आने वाले वर्षों में अपने व्यापार में 25 फीसदी तक की ग्रोथ वह देख रहे हैं।  

Note - यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।

Edited By: Manish Mishra