Cotton Sowing in Kharif: जुलाई की अच्छी बारिश के बाद कैसा है कपास की खेती का हाल? टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर?
जुलाई की अच्छी बारिश के बाद खरीफ कपास की बुवाई का रकबा बढ़ा है, हालांकि यह पिछले साल से कम ...और पढ़ें

जुलाई के पहले हफ्ते में बढ़ी कपास की बुवाई
HighLights
जुलाई की बारिश से कपास बुवाई के रकबे में वृद्धि हुई।
कपास का रकबा पिछले साल से 23% कम दर्ज किया गया।
उत्पादन घटने से कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की कमी।
नई दिल्ली| अलनीनो (El Nino) संकट और मानसून की बारिश में कमी के पूर्वानुमान के बीच जुलाई के पहले हफ्ते में जबरदस्त बारिश हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में बेहद कम थी, जिसमें कपास के रकबे में भारी गिरावट आई थी। कपास भारत की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है, जिससे देश का कपड़ा उद्योग भी निर्भर है। जुलाई की शुरुआती बारिश के बाद कपास की खेती का क्षेत्रफल बढ़ा है।
कितना रहा बुवाई का क्षेत्रफल
सरकार के 05 जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में कपास की बुवाई हुई थी जो पिछले साल की इस अवधि तक 82 लाख हेक्टेयर से करीब 23 फीसदी कम है।
कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने मीडिया को बताया कि इस दौरान अच्छी बारिश होने से इस अंतर में कमी आई है। उन्होंने आगे कहा कि खरीफ में कपास की बुवाई का समय आमतौर पर 15 जुलाई तक समाप्त हो जाता है, लेकिन मानसून में देरी के कारण इस सीजन में इसे 30 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।
उत्पादन को लेकर कितना लक्ष्य?
खरीफ में कम बारिश होने के IMD के अनुमान के बाद ही सरकार ने कपास की पैदावार को लेकर अनुमान जारी किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कृषि मंत्रालय के नए अनुमान के अनुसार, 2025-26 के लिए कपास उत्पादन 170 किलोग्राम के 290.91 लाख गांठों का रहा, जो 2024-25 के 297.24 लाख गांठों से कम है।
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टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर क्या असर?
कपास की पैदावार में कमी के चलते कपड़ा उद्योगों में कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए कपास का आयात बढ़ सकता है, जिससे चलते रॉ मैटेरियल की कीमत बढ़ेगी और कपड़ों की कीमत बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
