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Yamuna Expressway बनाने वाली JP Associates की ₹10 हजार से इस शख्स ने की थी शुरुआत, फिर ऐसे हो गई बर्बाद!

Published: Tue, 07 Apr 2026 01:51 PM (IST)Updated: Fri, 10 Apr 2026 05:40 PM (IST)

जयप्रकाश गौड़ ने ₹10 हजार से जयप्रकाश एसोसिएट्स की नींव रखी, जो उत्तर भारत की बड़ी कंपनी बनी। यमुना एक्सप्रेसवे ...और पढ़ें

Yamuna Expressway बनाने वाली JP Associates की ₹10 हजार से इस शख्स ने की थी शुरुआत, फिर ऐसे हो गई बर्बाद!

Yamuna Expressway बनाने वाली JP Associates की ₹10 हजार से इस शख्स ने की थी शुरुआत, फिर ऐसे हो गई बर्बाद!

HighLights

  1. जयप्रकाश गौड़ ने ₹10 हजार से JP ग्रुप की शुरुआत की।

  2. यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया।

  3. भारी कर्ज के कारण कंपनी दिवालिया होकर अदाणी को बिकी।

नई दिल्ली। दिवालिया होकर बिकी जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) आज भले ही अदाणी ग्रुप का हिस्सा है, लेकिन एक समय था जब उत्तर भारत में इस कंपनी की तूती बोलती थी। इसे शुरू करने वाले एक सरकारी इंजीनियर थे। 7 साल तक उन्होंने सिंचाई विभाग में बतौर इंजीनियर नौकरी की। नौकरी के दौरान उन्हें लगा कि कुछ अलग करना चाहिए। कुछ अलग करने की चाहत ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया। और यही मजबूरी आगे चलकर एक बड़े साम्राज्य की नींव बनी। वो शख्स कोई और नहीं बल्कि, जयप्रकाश एसोसिएट्स को खड़ा करने वाले उसके फाउंडर जयप्रकाश गौड़ हैं।

दिवालिया होकर बिकी JP Associates को खरीदने के लिए गौतम अदाणी की अदाणी ग्रुप और अनिल अग्रवाल की वेदांता ग्रुप के बीच कई दिनों तक तकरार चली। तकरार इतनी, कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अदाणी के पक्ष में फैसला सुनाया।

दो दिग्गजों के बीच एक कंपनी खरीदने की ये कहानी इंटरनेट पर छाई है। लेकिन हम बात करेंगे कि आखिर जयप्रकाश गौड़ ने कैसे जेपी ग्रुप की शुरुआत की और फिर कैसे यह कंपनी दिवालिया होकर अदाणी के हाथों बिकी। आइए विस्तार से सब कुछ समझने की कोशिश करते हैं।

सरकारी इंजीनियर बना ठेकेदार

जयप्रकाश गौड़ का जन्म 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के एक छोटे से गांव में हुआ था। जैसे बचपन मे हर एक बच्चे का बड़ा आदमी बनने का सपना होता है, वही सपना जयप्रकाश का भी था। उन्होंने अपने शहर से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद थॉम्पसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और यहां से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया। यह कॉलेज आगे चलकर IIT Roorkee बना। यानी कह सकते हैं कि जयप्रकाश गौड़ ने IIT रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद जयप्रकाश उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में सिविल इंजीनियर बन गए। रोजी रोटी अच्छे से चल रही थी। लेकिन उनके अंदर कुछ और चल रहा थ। वह कुछ बड़ा करना चाहते थे। बड़ा करने के लिए उन्हें सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ती। और उन्होंने किया भी कुछ ऐसा ही।

कुछ साल नौकरी करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और ठेकेदार बन गए। शुरुआत उन्होंने 10 हजार रुपये की जमापूंजी से की। उन्हें छोटी-मोटी सड़क बनाने का ठेका मिलने लगा। और यहीं से जेपी ग्रुप की नींव पड़ चुकी थी, जो आगे चलकर उत्तर भारत की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाने वाली थी।

जयप्रकाश गौड़ की कंपनी धीरे-धीरे तरक्की की सीढ़ियां चढ़ने लगी। 1970 और 1980 के दशकों में जेपी ग्रुप ने कई बड़े हाइड्रोपावर और नदी-घाटी प्रोजेक्ट के ठेके हासिल किए। उन्होंने इतना अच्छा काम किया की वह उत्तर भारत के भरोसेमंद चेहरा बन गए। सड़कों और बांधों से लेकर थर्मल और हाइड्रोपावर संयंत्रों तक उनकी कंपनी, जयप्रकाश एसोसिएट्स ने बुनियादी ढांचे से कहीं अधिक अपनी प्रतिष्ठा का निर्माण किया।

Yamuna Expressway को JP Associates की JP Infratech ने बनाया

2000 के दशक की शुरुआत तक, जेपी ग्रुप हर जगह मौजूद था। पावर, सीमेंट, हॉस्पिटैलिटी से लेकर रियल एस्टेट तक। हर बिजनेस में इस समय तक जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स छाई थी। 2007 में इसका मार्केट कैप 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा था।

2003 में जेपी ग्रुप को एक बड़ा ऑर्डर मिला। यह ऑर्डर था 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे बनाने का। ग्रेटर नोएडा से शुरू होकर आगरा तक यह एक्सप्रेस वे जाता। इस ऑर्डर के साथ जेपी को इस कॉरिडोर के किनारे 25 मिलियन वर्ग मीटर जमीन पर रियल एस्टेट डेवलपमेंट के अधिकार भी मिला।

ग्रेटर नोएडा और आगरा को जोड़ने वाली इस परियोजना (Yamuna Expressway) का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर जनवरी 2008 में शुरू हुआ और 9 अगस्त, 2012 को इसका उद्घाटन किया गया। यमुना एक्सप्रेस वे बनाने में 13,000 करोड़ रुपये की लागत लगी थी।

2008 की आर्थिक मंदी से हिला जेपी ग्रुप

Jaypee ने एक ही समय पर पावर प्लांट, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी कर्ज लिया। उन्होंने खुद को आर्थिक और ऑपरेशनल, दोनों ही तरह से बहुत ज्यादा फैला दिया। कंपनी के पास बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स थे। लेकिन उन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए कैपिटल नहीं थी। इसके लिए उसे भारी भरकम कर्ज लेना पड़ा। इसी बीच 2008 में आई वैश्विक मंदी से जयप्रकाश गौड़ की जेपी ग्रुप को तगड़ा झटका लगा।

लोन लेकर प्रोजेक्टर पूरा करने में लगी जेपी ग्रुप का कर्ज 2009 में ₹11,000 करोड़ से बढ़कर 2016 में 50 हजार करोड़ के पार जा चुका था। कर्ज चुकाने के लिए उनका फॉर्मूला था कि बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनाओ और फिर उसे बेचकर कर्ज चुकाओ। लेकिन यह फॉर्मूला काम नहीं आया।

कर्ज चुकाने का यह मॉडल पूरी तरह से तेजी वाले बाजार और लगातार कैश फ्लो पर निर्भर था। जब इनमें रुकावट आई, तो जेपी ग्रुप के प्रोजेक्ट आधे में ही लटक गए।

2011 में शुरू हुई भारतीय रियल एस्टेट की मंदी ऊंची कीमतें, बढ़ती ब्याज दरें और गिरती बिक्री ने जेपी इंफ्राटेक को बुरी तरह प्रभावित किया। खरीदारों की कमी और नकदी प्रवाह में देरी के चलते, कंपनी को अपने विशाल नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में काफी संघर्ष करना पड़ा।

खरीदारों ने प्रोजेक्ट में सुस्ती, कंस्ट्रक्शन रुकने और किसी भी तरह के कम्युनिकेशन न होने की शिकायतें कीं। Wish Town, जो कभी एक सपना था, 30,000 से ज्यादा घर खरीदारों के लिए एक बुरा सपना बन गया।

Yamuna Expressway बनाने वाली जेपी की JP इंफ्राटेक हुई दिवालिया

IDBI बैंक के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम की याचिका के बाद, JP इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) अगस्त 2017 में आधिकारिक तौर पर डिफॉल्ट हो गई और कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में चली गई। ऐसा बढ़ते कर्ज और प्रोजेक्ट्स को पूरा न कर पाने की वजह से हुआ। 2024 में इस कंपनी को सुरक्षा ग्रुप ने अपने अधिकार में ले लिया, और 21 फरवरी, 2025 को इसके शेयर्स डीलिस्ट कर दिए गए।

फ्लैगशिप कंपनी भी हुई दिवालिया

बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनाने वाली JP इंफ्राटेक लिमिटेड ही नहीं बल्कि ग्रुप की पैरेंट कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स भी कर्ज के भंवर में फंस चुकी थी। कर्ज के भंवर में कंपनी ऐसी फंसी कि निकलना असंभव सा हो गया। फिर क्या 3 जून, 2024 को, जयप्रकाश एसोसिएट्स को झटका देते हुए, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने कंपनी के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई की दिवालियापन याचिका स्वीकार कर ली। और दिवालियेपन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई।

पहले इसे खरीदने की बोली वेदांता ग्रुप ने जीती थी। उसने 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाई थी। लेकिन बाद में लेंडर्स ने अदाणी ग्रुप को प्राथमिकता दी। क्योंकि अदाणी ग्रुप का पेमेंट प्लान लेंडर्स को पसंद आया था। आज अदाणी ग्रुप जेपी एसोसिएट्स का मालिक है।

तो यह थी जयप्रकाश एसोसिएट्स की फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक की पूरी कहानी।

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