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8th Pay Commission: शिक्षकों को TET से छूट और सरकारी कर्मचारियों के OPS पर बड़ी खुशखबरी

Published: Mon, 28 Sep 2026 09:07 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों को 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित पदों पर NPS से OPS में जाने की अनुमति ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों को OPS का तोहफा, शिक्षकों को TET से मिलेगी राहत

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों को OPS का तोहफा, शिक्षकों को TET से मिलेगी राहत

HighLights

  1. सरकारी कर्मचारी 2009 से पहले विज्ञापित पदों पर OPS चुन सकेंगे।

  2. जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने शिक्षकों को TET से छूट का प्रस्ताव पारित किया।

  3. यह फैसला दिल्ली जैसे अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मिसाल बनेगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अहम घटनाक्रम में, आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं। इन आदेशों के तहत, 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित पदों पर चुने गए कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में जाने की अनुमति दी गई है। यह खास कट-ऑफ तारीख बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वह समय है जब इस क्षेत्र में NPS को आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था, जबकि जम्मू-कश्मीर तब भी अपने खुद के संविधान के तहत काम कर रहा था।

चूंकि जम्मू-कश्मीर 2019 से एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) के तौर पर काम कर रहा है, इसलिए इस प्रशासनिक जीत ने दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों, खासकर दिल्ली के कर्मचारियों में बहुत उम्मीद जगाई है। अभी, दिल्ली सरकार के कई कर्मचारी, जिन्हें जून 2004 से पहले विज्ञापित पदों के लिए चुना गया था, NPS से OPS में जाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर का यह फैसला एक मजबूत क्षेत्रीय मिसाल बन गया है।

इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 24 और 25 सितंबर के बीच एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव का मकसद 'रहबर-ए-तालीम' (ReT) स्कीम के तहत नियुक्त शिक्षकों को अनिवार्य 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) पास करने की शर्त से छूट दिलाना है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के कारण, विधानसभा का यह प्रस्ताव तब तक कानूनी रूप से लागू नहीं हो सकता, जब तक इसे उपराज्यपाल से औपचारिक मंजूरी और केंद्रीय गृह मंत्रालय से अंतिम मंजूरी न मिल जाए।

इन प्रशासनिक अड़चनों के बावजूद, विधायी स्तर पर उठाया गया यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्व रखता है। यह पूरे भारत में उन शिक्षकों का हौसला बढ़ाता है जिनकी नियुक्ति 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) एक्ट 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। इसके अलावा, यह एक साहसी राजनीतिक मिसाल कायम करता है जो अन्य राज्य सरकारों को भी अपने पुराने शिक्षकों के लिए ऐसी ही छूट मांगने के लिए प्रेरित कर सकता है। इससे पुरानी नियुक्तियों के लिए अनिवार्य TET योग्यता पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त फैसलों को भी चुनौती मिल सकती है।

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