नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। जेट एयरवेज को कर्ज देने वाले सरकारी बैंकों का समूह कंपनी में प्रोमोटर और चेयरमैन नरेश गोयल की हिस्सेदारी को कम किए जाने के पक्ष में हैं।

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक चाहते हैं कि जेट एयरवेज में नरेश गोयल की हिस्सेदारी को कम कर 10 फीसद किया जाए। साथ ही वह चेयरमैन के पद से गोयल को हटाए जाने के पक्ष में हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'बैंक चाहते हैं कि जेट एयरवेज में नरेश गोयल की हिस्सेदारी को कम कर 10 फीसद किया जाए,जो बैंकों के समाधान योजना में पेश की गई योजना से भी कम है। बैंकों की समाधान योजना में गोयल की हिस्सेदारी को कम कर 17 फीसद किए जाने का प्रस्ताव है।'

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में बैंकों का समूह जेट एयरवेज के लिए समाधान योजना पर काम कर रहा है। जेट पर करीब 8,200 करोड़ रुपये का कर्ज है। जेट एयरवेज में कंपनी के फाउंडर नरेश गोयल और उनके परिवार की करीब 52 फीसद हिस्सेदारी है, जबकि रणनीतिक साझेदार और अबू धाबी की कंपनी एतिहाद की 24 फीसदी हिस्सेदारी है।

नकदी संकट की वजह से जेट कर्ज चुकाने में नाकाम रही है। इसके साथ ही वह पायलटों और अन्य वेंडर्स का बकाया नहीं चुका पाई है, जिसकी वजह से उसे अपने 40 से अधिक विमानों को ऑपरेशन से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

वेतन नहीं मिलने की वजह से पायलटों ने जहां हड़ताल पर जाने की धमकी दी है, वहीं अन्य कर्मचारियों ने इस मामले में सरकार से दखल दिए जाने की मांग की है।

हाल ही में एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था कि जेट को मुश्किल से निकालने के लिए समाधान योजना तैयार है और बैंक नहीं चाहते कि यह कंपनी बंद हो।

उन्होंने कहा था कि जेट को दीवालिया प्रक्रिया में डालना अंतिम विकल्प होगा। 

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Posted By: Abhishek Parashar

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