मुगल काल का सबसे अमीर भारतीय परिवार! औरंगजेब के पोते ने फतेह चंद को बनाया था 'जगत सेठ'; देश भर में चलता था सिक्का
जगत सेठ परिवार 18वीं शताब्दी में भारत का सबसे अमीर कारोबारी और बैंकर घराना था, जिसकी संपत्ति इंग्लैंड के सभी ...और पढ़ें
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मुगल काल का सबसे अमीर परिवार!
HighLights
जगत सेठ परिवार 18वीं सदी का सबसे अमीर भारतीय बैंकर था
इनकी संपत्ति इंग्लैंड के सभी बैंकों की कुल संपत्ति से अधिक थी
प्लासी युद्ध में भूमिका के बाद पतन हुआ और साम्राज्य ढह गया
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अमीर लोग हर जमाने में रहे हैं। बस उनका नाम, शख्सियत और चेहरे बदल जाते हैं। जैसे आज भारत में अंबानी-अदाणी का नाम है, उसी तरह मुगल काल में भी कई अमीरों की चर्चा थी। इनमें से एक परिवार था जगत सेठ परिवार (Jagat Seth Family History)।
जगत सेठ 18वीं शताब्दी में भारत के सबसे अमीर कारोबारी, साहूकार और बैंकर के रूप में पहचाना जाने वाला फेमस घराना था। जगत सेठ कोई नाम नहीं, बल्कि एक टाइटल था। ये टाइटल औरंगजेब के पोते मुहम्मद शाह ने इस घराने के सेठ फतेहचंद को दिया था, जो परिवार के सबसे प्रभावशाली प्रभावशाली शख्स थे।
इंग्लैंड के बैंकों से अधिक पैसा
यह एक मारवाड़ी जैन परिवार था, जो राजस्थान के नागौर का रहने वाला था। बाद में ये पटना और फिर बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद में आकर बस गया। इस परिवार के पास अकूत संपत्ति थी। ब्रिटिश दस्तावेजों के अनुसार, इनकी दौलत इंग्लैंड के सभी बैंकों की कुल संपत्ति से भी कहीं ज्यादा थी।
कैसे करते थे कमाई?
- जगत सेठ परिवार की कमाई के कई साधन थे। इनमें हुंडी (Credit/Bill of Exchange) शामिल थी, जिसका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। बंगाल, बिहार और ओडिशा का सरकारी लगान (Tax) इन्हीं की कोठियों के माध्यम से दिल्ली के मुगल दरबार भेजा जाता था।
- अपनी रईसी के चलते ये परिवार मुगल बादशाह, बंगाल के नवाब और ईस्ट इंडिया कंपनी तक को लोन देता, जो इनकी कमाई का बड़ा जरिया था।
- इस परिवार को बंगाल सरकार के राजस्व प्रबंधन के अलावा खुद के सिक्के ढालने का भी अधिकार दिया गया था।
मुगल काल के मनी चेंजर
उस दौर में भारत में अलग-अलग रियासतों के विभिन्न सिक्के चलते थे। जगत सेठ का परिवार 'मनी चेंजर' के रूप में काम करता था और सिक्कों की शुद्धता जांचकर उन्हें एक्सचेंज करता था। इसके अलावा उन्होंने शोरा (बारूद बनाने का कच्चा माल), रेशम, चीनी और अफीम का बड़े पैमाने पर कारोबार जमा लिया था। कारोबार से मिले मुनाफे से वे एक बैंकिंग साम्राज्य बना पाए।
प्लासी का युद्ध (1757)
बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला ने जगत सेठ (उस समय परिवार के मुखिया महताब राय थे) से भारी टैक्स मांगा और उनका अपमान किया, तो इस घराने ने नवाब के खिलाफ साजिश रची। परिवार ने रॉबर्ट क्लाइव और ईस्ट इंडिया कंपनी की वित्तीय की और मीर जाफर के साथ मिलकर नवाब को गद्दी से हटाने में मुख्य भूमिका निभाई। इसी युद्ध के बाद भारत में अंग्रेजी शासन की नींव पड़ी।
ऐसे हुआ पतन
सिराज-उद-दौला के बाद जब मीर कासिम बंगाल का नवाब बना, तो उसने जगत सेठ महताब राय और उनके भाई पर राजद्रोह का आरोप लगाकर 1764 में बक्सर के युद्ध से ठीक पहले उनकी हत्या करवा दी। इसके बाद अंग्रेजों ने भी इनसे लिया हुआ कर्ज वापस नहीं किया, जिससे धीरे-धीरे इस महाधनी घराने का पूरा साम्राज्य ढह गया और 19वीं सदी के अंत तक इनका नामोनिशान गायब हो गया।
