नई दिल्ली, पीटीआइ। देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कंपनी की ऑडिट समिति मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलिल पारेख और मुख्य वित्त अधिकारी निलांजन रॉय के खिलाफ व्हिसिलब्लोअर समूह की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही है। बता दें कि कंपनी के एक व्हिसिलब्लोअर समूह ने आरोप लगाया है कि सलिल पारेख और निलांजन रॉय दोनों ने अनैतिक तरीके से आय बढ़ाने की कोशिश की है। व्हिसिलब्लोअर की शिकायत के बाद सोमवार को इस मसले को ऑडिट समिति के सामने रखा गया।

नीलेकणि ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि समिति ने स्वतंत्र आंतरिक ऑडिटर ईकाई और कानूनी फर्म शारदुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी से स्वतंत्र जांच के लिए बातचीत शुरू कर दिया है। मालूम हो कि इस बाबत 20 और 30 सितंबर 2019 को दो अज्ञात शिकायतें प्राप्त हुईं थीं। इस मामले के सामने आने के बाद मंगलवार को इंफोसिस का शेयर 16 फीसद तक गिर गया। बीएसई पर कंपनी का शेयर 15.94 फीसद गिरकर 645.35 रुपये पर आ गया। वहीं एनएसई पर यह 15.99 फीसद घटकर 645 रुपये प्रति शेयर रह गया।

क्या हैं आरोप- वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही के दौरान अधिक मुनाफा दिखाने के लिए व्हिसलब्लोअर्स से वीजा लागतों को कम करने के लिए कहा गया। इसके अलावा 353 करोड़ रुपये के रिवर्सल को भी नजरंदाज करने के लिए दबाव डालने का आरोप है। आरोपों के मुताबिक, अधिकारियों ने गैरकानूनी तरीके से मुनाफा बढ़ाकर स्टॉक्स की ऊंची कीमत बनाए रखा, इसके अलावा वेरिजॉन, इंटेल और संयुक्त उपक्रमों जैसे बड़े सौदों में हेराफेरी की बात भी कही गई है। इन पर यह भी आरोप है कि ऑडिटर्स और कंपनी बोर्ड से संवेदनशील जानकारियां छिपाई गई, जबकि पारेख ने कर्मचारियों से कहा था कि बोर्ड के सामने बड़ी डील के आंकड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियां नहीं रखी जाएं।

ये कोई पहला आरोप नहीं

उल्लेखनीय है कि कंपनी पर इससे पहले भी वित्तीय अनियमितता के आरोप लग चुके हैं। हाल में ही कंपनी की ओर से इजरायल की ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी कंपनी पनाया की खरीद के समय भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। यह शिकायत भी व्हिसलब्लोअर ने की थी। हालांकि, इसे कंपनी की आंतरिक कमेटी गलत ठहराया था।

Posted By: Nitesh

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